इस रक्षाबंधन भाई-बहन सावन सोमवार के शुभ संयोग में एक-दूसरे की सुरक्षा और समृद्धि की कामना करेंगे। हालांकि, बहनों को सुबह-सुबह भाई की कलाई सजाने से परहेज करना होगा। वो इसलिए क्योंकि सुबह 9.28 बजे तक भद्रा है। इसके बाद 12 घंटे रक्षासूत्र बांधने के लिए शुभ मुहूर्त है। इस बीच विशेष महत्व वाले 3 मुहूर्त भी मिलेंगे।
ज्योतिषियों के मुताबिक इस बार रक्षाबंधन समसप्तक और त्रियोग के शुभ संयोग में मनाया जाएगा। इस दिन श्रावण पूर्णिमा है। प्रीति, सौभाग्य और आयुष्मान योग पड़ने से इस पूर्णिमा का महत्व और भी बढ़ जाता है। सुबह पाताल लोक की भद्रा है। वैसे तो इसका पृथ्वी पर कोई प्रभाव नहीं माना जाता, लेकिन शास्त्रों में भद्रा के वक्त राखी बांधने को त्याज्य माना गया इसलिए बहनों को सुबह 9.28 बजे से पहले राखी बांधने से परहेज करना चाहिए। पूर्णिमा तिथि रात 7.27 बजे तक रहेगी। इस लिहाज से भाई-बहन को इस बार रक्षाबंधन मनाने के लिए 12 घंटे का समय मिलेगा। परंपरा के अनुसार इस दिन को विद्यारंभ के लिए भी शुभ माना गया है। मान्यता है कि प्राचीन दौर में ऋषि मुनि इसी दिन अपने आश्रम में छोटे बच्चों का अध्ययन शुरू करवाते थे। पंच गव्य से हवन करते थे। इसे ‘उपाकर्म’ कहा जाता था। शास्त्रों के मुताबिक अभिभावकों को रक्षाबंधन पर मां शारदा का स्मरण कर बच्चों के हाथ में रक्षासूत्र बांधकर नई कलम देनी चाहिए, फिर सफेद कागज पर ‘ऐं’ लिखवाकर विद्यारंभ करवाना चाहिए।
विशेष महत्व वाले तीन शुभ मुहूर्त इस वक्त पर
- सुबह 11.36 से 12.24 तक
- दोपहर 1.11 से 3.36 बजे तक
- रात 7.19 से 8.54 बजे तक
भाइयों को राशि अनुसार बांधें राखी
- मेष: नारंगी धागा और सिंदूर का तिलक
- वृषभ: सफेद धागा और चमकीला तिलक
- मिथुन: नारंगी, चमेली की सुगंध का तिलक
- कर्क: सफेद धागा, चंद्राकार लाल तिलक
- सिंह: लाल गुलाबी, गुलाब जल युक्त टीका
- कन्या: नीला धागा, चावल हल्दी का का टीका
- तुला: पीला धागा, चांदी के अर्क का टीका
- वृश्चिक: लाल धागा, शहद युक्त लाल तिलक
- धनु: केसर युक्त तिलक, चावल का तिलक
- मकर: नीला चमकीला, रोली का तिलक
- कुंभ: मोर पंख युक्त धागा, घी का टीका
- मीन: पीला धागा, चंदर-कुमकुम का टीका।
मान्यता - राजा बली को मां लक्ष्मी ने बांधी थी राखी, तभी से ये परंपरा
शास्त्रों के अनुसार भगवान विष्णु ने वामन रूप धारण कर राजा बलि से छल किया था। सबकुछ जान लेने के बाद भी राजा बली ने भगवान से कुछ नही कहा। भगवान उसकी इस कर्तव्य परायणता से प्रसन्न होते हैं और राजा बलि खुद ही उनका द्वारपाल बनकर पाताल लोक में चले जाते हैं। मां लक्ष्मी बड़ी सहजता से राजा बली को श्रावण पूर्णिमा पर भाई के रूप मे संबोधित कर रक्षा सूत्र बांधती हैं। अपने पति विष्णु को वापस लेकर आ जाती हैं। यह छोटी सी कथा भाई बहन के संबंधों को ही नहीं, बल्कि प्रतिज्ञा, सहृदयता, समानता और प्रेम सभी तथ्यों को प्रदर्शित करती है। इस घटना का ही प्रतिफल है कि रक्षा सूत्र बांधते समय राजा बली का स्मरण करते हुए ’येन बद्धो बली राजा’ कहा जाता है।
राखी बांधने से पहले और बाद बहनें ऐसे करें भाई की पूजा
भाई पूर्व की दिशा की ओर मुंह किए बैठा हो और बहनें पश्चिम की ओर। बहनें पहले खुद पर फिर भाई पर थोड़ा सा जल छिडकें। भाई को रोली और अक्षत का तिलक लगाएं। इसके बाद येन बद्धो बली राजा दानवेंद्रो महाबलः मंत्र का जाप करते हुए रक्षासूत्र बांधें। फिर भाई की आरती उतारकर मिठाई खिलाएं। भाइयों को अपनी बहन को उपहार देना चाहिए। भाई के अलावा इस दिन उन सभी को रक्षा सूत्र बांध सकते है जिनसे हमें अक्षय ज्ञान या अतुलनीय प्रेम प्राप्त हुआ हो। इससे हमारे संबंध भी प्रगाढ़ होंगे। भद्रा की अवधि में राखी बांधने से परहेज करें।
- डॉ. दत्तात्रेय होस्केरे, ज्योतिषाचार्य
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