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Jharkhand daily news

प्रखंड के सरैया गांव की महिला को एक वर्षों से लगातार आ रहे स्वप्न में शिवजी की पत्थर की मूर्ति सरैया गांव के कुष्मनी जंगल में नवमी के दिन खुदाई में मिली। इसकी जानकारी मिलते ही वहां देखने व पूजा के लिए जंगल में गांव के सैकड़ों महिला-पुरूष व बच्चों का तांता लगा है। जहां लोग शारीरिक दूरी व मास्क लगाना भी भूल गए हैं। बताते चलें कि प्रखंड क्षेत्र के सरैया गांव निवासी महावीर साव के पुत्र प्रभास साव की पत्नी पानपती देवी उम्र 38 वर्ष को एक वर्षों से स्वप्न में गांव से लगभग पांच किलाेमीटर दूर कुष्मनी जंगल में एक नदी के बीच शिव की मूर्ति दिखाई देती थी। जिसे कहा जा रहा था कि तुम मेरी भक्त हो और हमें यहां से बाहर निकालो इसकी चर्चा पानपती अपने परिवार में करती थी पर लोग उसे मन का भ्रम बताकर भूलने की बात करते रहते थे।

पर मंगलवार नवमी पूजा के दिन महिला घर में पूजा के बाद अपनी बड़ी गोतनी से बोली कि मैं जंगल से बकरी चराकर आ रही हूं। सुबह सात बजे करीब महिला जंगल के नदी किनारे पहुंच कर स्वप्न वाली जगह पर खुदाई की। जहां उसे एक काले पथर का शिवलिंग मिला। जिसमें आदमी के तरह नाक मुहं व कान साफ दिखाई दे रहा था। इसके बाद उसने अपने पति सुभाष साव ससुर महाबीर साव कुछ ग्रामीण के साथ पहुंच कर मूर्ति को वहीं बगल में स्थापित कर दी।

महिला के कथनानुसार अगले नव दिन के बाद शीतला मां की भी प्रतिमा कहीं आस-पास ही मिलेगी। ऐसा उसने स्वप्न में देखा है फिर इस बात की खबर आग की तरह गांव में फैल गई। जहां पहुंचने के लिए एक जंगली पगडंडी के सहारे सैकड़ों लोग बाइक व पैदल पहुंचकर पूजा पाठ कर रहे हैं। और बीते नव दिनों तक 24 घण्टे उक्त परिवार के साथ ग्रामीण भी जमे हुए हैं। परन्तु इस बीच वहां जो देखने को मिला वहा पर लगी भीड़ में महिला पुरुष या बच्चे बिना मास्क व शारीरिक दूरी का पालन नहीं कर रहे हैं।



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