पवन कुमार मिश्र,सरकारी स्कूलों में करोड़ों खर्च करने के बाद भी बच्चे नामांकन नहीं ले रहे हैं। जबकि निजी स्कूलों में पढ़ाई का खर्च आसमान छूने के बाद भी अभिभावक वहां पढ़ाना पसंद करते हैं। जिले में कई ऐसे सरकारीस्कूल हैं, जहां नामांकन 20 से भी कम है। एक स्कूल में सिर्फ दो बच्चों ने नामांकन लिया जबकि एक में सिर्फ छह ने। ये आंकड़े 9वीं कक्षा के नामांकन का है जो 2021 में बोर्ड परीक्षा देंगे। इसके विपरीत इन्हीं जगहों पर निजी स्कूलों में 9वीं कक्षा में नामांकित बच्चों की संख्या 200 से 300 है।
सरकारी स्कूलों में बच्चों के नामांकन नहीं लेने का कारण पहले यहां शिक्षकों की कमी बताया जा रहा था। लेकिन पिछले वर्ष शिक्षकों की नियुक्ति के बाद अधिकतर स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर हो चुकी है। सरकारी स्कूल के बच्चों की पढ़ाई का खर्च निजी विद्यालय के बच्चों के खर्च से 10 फीसदी से भी कम है। जहां सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाली लड़कियों के सारे खर्च सरकार वहन करती है। लड़कों को एडमिशन के दौरान 135 रुपए, फॉर्म भरने के दौरान 500 रुपए खर्च करना पड़ता है। किताब व ड्रेस अब सरकार देती है। ऐसे में सरकारी स्कूल से मैट्रिक की पढ़ाई करने वाले छात्रों को एक से दो हजार रुपए ही खर्च करना होता है।
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