मनरेगाकर्मियों पर ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम की अपील बेअसर रही। राज्यभर के 5 हजार से ज्यादा मनरेगाकर्मी सोमवार से अपनी मांगों को लेकर बेमियादी हड़ताल पर चले गए। दूसरी ओर, अचानक एक दिन में करीब पौने चार लाख मनरेगा मजदूर घट गए। 26 जुलाई को जहां मनरेगा योजनाओं में काम करनेवालों की संख्या 742447 थी, वह 27 जुलाई को 370394 रह गई। यानी एक ही दिन में 372053 मजदूर घट गए। यदि हड़ताल जारी रही तो यह संख्या शून्य तक पहुंच सकती है।
मजदूरों को अटेंडेंस बनाने में परेशानी : हड़ताल से मनरेगा मजदूरों की इंट्री या मस्टररोल बनाने का काम भी ठप हो गया है। अगर हड़ताल जारी रही तो अगले कुछ ही दिनों के भीतर न तो मजदूरों की डिमांड लिखी जा सकेगी और न ही उन्हें कोई काम दिया जा सकेगा। हड़ताल के कारण जो मनरेगा मजदूर सोमवार को काम पर आए उनका अटेंडेंस बनाना भी मुश्किल हो गया। हड़ताल के बाद सारी जवाबदेही बीडीओ के कंधों पर आ गई है।
विकास आयुक्त की बैठक स्थगित
मनरेगा कर्मियों की मांगों पर विचार करने के लिए विकास आयुक्त की अध्यक्षता में बनी कमेटी की मंगलवार को शाम 5 बजे से होनेवाली बैठक अपरिहार्य कारण बताकर स्थगित कर दी गई है। बैठक में ग्रामीण विकास सचिव आराधना पटनायक व वित्त सचिव को शामिल होना था।
आलमगीर बोले-जायज मांगें मानी जाएंगी : ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम ने कहा-मनरेगा कर्मियों की जायज मांगें मान ली जाएंगी। मैं खुद आंदोलनकारियों से बात करूंगा। उधर, झारखंड राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ के महासचिव मो. इम्तियाज ने हड़ताल सफल बताया।
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