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मवेशी चरा रही युवती से दुष्कर्म, सीआरपीएफ जवान गिरफ्तार

दोरनापाल थाना क्षेत्र के दुब्बाटोटा कैंप में तैनात सीआरपीएफ 150 बटालियन के 26 वर्षीय जवान दुलीचंद पांचे को गुरुवार सुबह पूछताछ के बाद पुलिस ने गिरफ्तार किया। जवान पर दुब्बाटोटा गांव की 20 वर्षीय युवती ने दुष्कर्म का आरोप लगाया है। एएसपी सुनील शर्मा ने बताया कि जवान ने अपना गुनाह कबूल कर लिया है।
बुधवार शाम 7 बजे पीड़िता परिजनों व आदिवासी समाज के पदाधिकारियों के साथ दोरनापाल थाने पहुंची और केस दर्ज कराया। घटना सोमवार दोपहर की है। एसपी शलभ सिन्हा ने बताया कि युवती की रिपोर्ट के बाद आरोपी जवान को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। एमपी के बालाघाट जिले के किरनपुर निवासी सीआरपीएफ की 150 बटालियन का जवान दुलीचंद छुट्‌टी से लौटने के बाद दुब्बाटोटा स्कूल में 21 दिनों के लिए क्वारेंटाइन में था। जवान ने 18 दिनों का क्वारेंटाइन पूरा कर लिया था। यहां 97 जवानों को क्वारेंटाइन में रखा गया था। दुष्कर्म पीड़िता गोरगुंडा गांव की है। वह बीते एक माह से खेती-किसानी का काम देखने अपनी चाची के घर दुब्बाटोटा आई हुई थी।
वारदात वाले दिन सोमवार को पीड़िता चचेरी छोटी बहन के साथ मवेशी चराने निकले थे। दोनों युवतियों को क्वारेंटाइन सेंटर के पीछे कुछ ही दूरी पर मवेशी चराता देखकर जवान मौके पर पहुंचा। कुछ देर युवतियों से नाम-पता पूछने के बाद दोनों का हाथ पकड़कर साथ बैठने के लिए दबाव बनाने लगा। इस बीच पीड़िता की छोटी बहन जवान से हाथ छुड़ाकर वहां से भाग निकली। पीड़िता के रोने-चिल्लाने पर जवान ने उसका मुंह दबाकर उसके साथ दो बार दुष्कर्म किया और क्वारेंटाइन सेंटर की ओर भाग गया। वारदात से डरी पीड़िता ने घर पहुुंचकर परिजनों को वारदात की जानकारी नहीं दी। बाद में चचेरी बहन ने अपने माता-पिता को बताया और गांव में सामाजिक बैठक कर सभी बुधवार शाम केस दर्ज कराने थाने पहुंचे।

जवानों की करतूत पर अफसरों की जिम्मेदारी तय हो
पूर्व विधायक व अखिल भारतीय आदिवासी महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनीष कुंजाम ने दुब्बाटोटा गांव में जवान द्वारा युवती के साथ दुष्कर्म करने की घटना की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि दुब्बाटोंटा में फोर्स का कैंप व जवानों के लिए बनाया गया क्वारेंटाइन सेंटर दोनों नेशनल हाईवे 30 पर है। बावजूद जवान इस तरह के करतूत को अंजाम देने का दुस्साहस करने से बाज नहीं आ रहे हैं। ऐसे में बस्तर के अंदरूनी इलाकों में तैनात पुलिस व पैरामिलिट्री फोर्स के कैंपों में आदिवासियों के साथ होने वाले अत्याचार व शोषण का अंदाजा लगाया जा सकता है। जवानों के करतूत के लिए उनके कमांडिंग अफसरों की भी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। इस तरह के वारदातों के कारण ही अंदरूनी इलाकों में फोर्स का कैंप खुलने पर आदिवासी खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं।



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