महमरा गांव के युवाओं के हौसले ने यहां की न केवल बेजा कब्जा वाली जमीन खाली करवाई बल्कि इस बंजर भूमि में हरियाली ला दी। पेड़ पौधे लगाओ जीवन बचाओ का नारा लेकर महमरा गांव के युवाओं ने 2017 में जो मुहिम शुरू की थी वो आज ऑक्सीजोन में तब्दील हो चुका है। यहां नीम अमरूद, सीताफल, करौंदा और मुनगा के पेड़ लहलहा रहे हैं।
महमरा गांव दुर्ग से 7 किमी दूर है। यहां बंजर भूमि पर 20 लोगों ने कब्जा कर लिया था। इन कब्जों को हटाना बड़ी चुनौती थी। युवाओं ने इसे हटवाकर अपने गांव में कम होते पेड़ों को और बढ़ाने की ठानी और जमीन को हरा-भरा बना दिया।
0.30 हेक्टेयर में मिश्रित प्रजाति के 340 पौधे रोपे
जुलाई 2017 में काम शुरू हुआ और 0.30 हेक्टेयर में मिश्रित प्रजाति के 340 पौधे रोपे गए। वृक्षारोपण कार्य के लिए मनरेगा मद से 4 लाख 32 हजार रुपए मंजूर किए गए। मनरेगा के माध्यम से फैसिंग और पंचायत का पम्प मिला। इससे पौधों को पानी देने का जुगाड़ हुआ। युवाओं की मेहनत रंग लाई और वे पौधे लगाने में जुट गए। बीरबल निषाद बताते हैं कि पेड़ पौधे लगाकर पुण्य के साथ घर चलाने के लिए रुपए भी कमाए।
जानिए, यहां के काम...
- 2017 में पौैधे रोपने का अभियान शुरू हुआ गांव में।
- 0.75 एकड़ एरिया को ऑक्सीजोन बनाया गया है।
- 340 से ज्यादा पौधे लगाए गए हैं कैंपस में।
- 1947 गांव की आबादी है। हरेक पौधे लगा रहे हैं।
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