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बच्चों को टीका लगवाने तक नहीं आ रहे लोग, बीमारियों का बढ़ा खतरा

कोरोना संक्रमण के खतरे के बीच लोग हॉस्पिटलों से दूरी बना रहे हैं लेकिन अब यह दूरी कोरोना से बचाव करेगी या नहीं, यह तो तय नहीं है लेकिन इस दूरी की वजह से बच्चों पर कोरोना के अलावा अन्य आधा दर्जन से ज्यादा बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। जी हां, कोरोनाकॉल में सरकारी हॉस्पिटलों में गिनती के ही लोग टीकाकरण के लिए पहुंच रहे हैं।
डाॅक्टरों की मानें तो अभी इक्का-दुक्का लोग ही टीकाकरण के लिए आ रहे हैं। समय पर वैक्सीनेशन नहीं होने से बच्चों में आधा दर्जन से ज्यादा गंभीर बीमारियों के होने का खतरा बना हुआ है। मेकॉज के पीडियाट्रिक डिपार्टमेंट के डॉक्टर अनुरूप साहू ने बताया कि समय पर यदि बच्चों का वैक्सीनेशन न किया जाए तो कई प्रकार की बीमारियों के प्रकोप का खतरा बना रहता है। वैक्सीनेशन में कई ऐसी दवाएं हैं जो नेशनल प्रोग्राम के तहत बच्चों को दी जाती हैं जिनका डोज देना बच्चों को बेहद जरूरी है। कोरोना संक्रमणकाॅल से पहले जनवरी 2019 से लेकर जून 2019 तक 25 सौ बच्चे वैक्सीनेशन के लिए मेकॉज पहुंचे थे। इस साल इन्हीं महीनों में कोरोना का प्रकोप रहा ऐसे में जनवरी 2020 से लेकर जून 2020 तक 1657 बच्चे ही वैक्सीनेशन के लिए मेकॉज पहुंचे हैं।

इन बीमारियों से बचाव के लिए लगाया जाता है टीका

  • बीसीजी- टीबी से बचाव के लिए।
  • ओपीवी- पोलियो से बचाव के लिए।
  • हेपेटाईटिस-बी- लीवर फेलियर, लीवर कैंसर से बचाव के लिए।
  • एचाआईबी- निमोनिया सैप्टीसिमया से बचाव के लिए।
  • पेंटावायलेंट- गलघोटू, कुकुरखांसी, टिटनेस, मस्तिष्क ज्वर से बचाव के लिए।
  • रोटा वायरस- रोटा वायरस डायरिया से बचाव के लिए।

कुल 22 प्रकार के टीके जन्म के बाद पांच साल की उम्र तक लगते हैं।



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