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लॉकडाउन में मनरेगा ने थामी ग्रामीण अर्थव्यवस्था

कोरोना संक्रमण के बाद ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती खड़ी होने लगी। 20 अप्रैल से बेरला के समस्त ग्राम पंचायतों में रोजगार मूलक कार्यों को स्वीकृत करा कर कार्य प्रारम्भ करना शुरू किया। ग्रामीण मजदूर अब महात्मा गांधी नरेगा के माध्यम से रोजगार प्राप्त करने लगें हैं। सितम्बर 2020 तक निर्धारित लक्ष्य का 150 प्रतिशत उपलब्धि प्राप्त कर लिया गया है। साथ ही वर्ष के लिए निर्धारित लक्ष्य का 85 प्रतिशत माह जुलाई 2020 में ही प्राप्त कर लिया गया है।

जहां लॉकडाउन में रोजगार के लगभग सभी साधन बंद थे। वहीं मनरेगा के जरिए ग्रामीण अंचल के अधिकतम परिवारों को उनके मांग अनुसार रोजगार दिया गया। 300 से अधिक हितग्राहियों की निजी भूमि में मेड़ बंधान के कार्य पूर्ण कराए गए है और 50 निजी तालाब निर्माण का कार्य भी कराया जा रहा है। निजी तालाबों से सिचाई के लिए पानी की उपलब्धता भी बनी हुई है। बेरला जनपद पंचायत के ग्राम पाहंदा के 21 हितग्राही वासुदेव, शकुन्तला, अनिता, महेश इत्यादि और ग्राम मोहभट्ठा निवासी मनीराम, बलीराम, लक्ष्मीबाई, अर्जुन, द्वारिका, डेरहा और कृपाल ने कहा कि उन्होंने मनरेगा अंतर्गत मेड़ बंधान का कार्य पा कर अपने ग्राम में ही लगातार रोजगार प्राप्त कर रहे हैं।

डबरी में अब मछली पालन
कुसमी निवासी खोमलाल व सुभद्रा बाई ने बताया कि मनरेगा के अंतर्गत निजी डबरी का निर्माण कराया गया है, जिसके जरिए वे मत्स्य पालन कर रहे हैं। ग्राम पंचायत बारगांव में बहुत संख्या में प्रवासी मजदूर के रूप में बाहर से गांव आने के उपरांत क्वारेंटाइन के बाद उनके सामने रोजगार की समस्या थी, उन्होंने भी रोजगार दिया गया। इस दौरान मनरेगा के तहत तालाब निर्माण, निजी तालाब निर्माण, तालाब गहरीकरण, सिंचाई नाली का निर्माण, नदी डिसिल्टिंग कार्य, भूमि सुधार कार्य, पौधरोपण आदि कराए गए।



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MNREGA stopped rural economy in lockdown


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