राज्य सरकार द्वारा गांवों में खुले में घूमने वालों मवेशियों पर रोक लगाने रोका-छेका अभियान चलाया गया। लेकिन इस का परिणाम जमीन पर अब तक नहीं दिखाई पड़ रहा है। गांव-गांव में कार्यक्रम आयोजित कर ग्रामीणों को मवेशियों को घर में बांधने या गोठान तक लाने का संकल्प दिलाया गया। ग्रामीण भी कार्यक्रम में संकल्प लेकर अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर दिया। इसके दूसरे दिन से ही ग्रामीण फिर से मवेशियों को खुले में ही छोड़ रहे हैं। इसका नतीजा यह हुआ कि अभियान के बाद भी मवेशी खेतों मंडराते या सड़कों पर बैठे नजर आ रहे हैं। दुर्गूकोंदल की सड़कों पर शाम होते ही चौक-चौराहों में मवेशियों का जमावड़ा लगा रहता है। जनपद पंचायत कार्यालय व शहीद वीर नारायण सिंह चौक पर रोजाना 25-30 मवेशी बैठी नजर आती है। मवेशियों के बैठे रहने से हादसे का अंदेशा बना रहता है।
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