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मृत्युभोज पर खर्च होने वाली राशि से जरूरतमंदों की मदद

मृत्युभोज के खिलाफ भास्कर के अभियान से लगातार लोग जुड़ते जा रहे हैं। रोजाना भास्कर द्वारा दिए वाट्सएप नंबर पर बड़ी संख्या में लोग मृत्युभोज का विरोध करने सहमति जता रहे हैं।
लोगों का कहना है मृत्युभोज जैसे आडंबर करने के बजाय सक्षम परिवारों को उक्त पैसों से गरीबों की मदद करनी चाहिए या उक्त पैसों को किसी रचनात्मक काम में लगाना चाहिए। कई लोगों ने मृत्युभोज की जगह तेरहवीं पर पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देते हुए मृतक की याद में पौधरोपण कराया तो किसी ने गरीबों की मदद की। एक परिवार ने तो लॉकडाउन के दौरान मृत्युभोज पर खर्च होने वाली राशि गरीब मजदूरों की मदद के लिए नगर पंचायत को सौंपी।
मृत्युभोज के बदले में किया पौधा वितरण
ग्राम बरदेभाठा निवासी शीतला प्रसाद पांडेय के पिता शिक्षाविद अवध प्रसाद पांडेय 59 वर्ष का निधन पिछले साल 28 दिसंबर को हो गया था। उनका तेरहवीं कार्यक्रम 10 जनवरी को रखा गया था। पुत्र ने तेरहवीं कार्यक्रम सादगी से संपन्न कराया। तेरहवीं के अवसर पर अपने पिता की स्मृति में 250 लोगों को फलदार पौधों वितरण किया तथा सभी से पौधों को अपने घरों में लगाने आग्रह किया। शीतला प्रसाद पांडेय ने कहा कि मृत्युभोज जैसे आडंबर समाज में बंद होना चाहिए। मृत्युभोज की जगह मृतात्मा की स्मृति में कोई रचनात्मक कार्य होना चाहिए।

तेरहवीं की राशि से कोरोना में मदद की
भानुप्रतापपुर सुभाषपारा निवासी गजाधर ठाकुर की पत्नी कांति ठाकुर का निधन लॉकडाउन के दौरान अप्रैल माह में हो गया था। परिवार ने मृत्युभोज जैसे कार्यक्रम नहीं किए। मृत्युभोज आदि में खर्च होने वाली राशि से परिवार ने लॉकडाउन के दौरान गरीबों को दान दिया। परिजनों ने सामुदायिक भवन पहुंचकर नगर पंचायत अध्यक्ष सुनील बबला पाढ़ी को गरीबों को वितरण करने चावल व 5001 रूपए की राशि प्रदान की। परिजनों के अनुसार मृत्युभोज जैसे आडंबर की बजाय उन पैसों से गरीबों को मदद करना चाहिए।



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Helping the needy with the amount spent on the death row


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