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शिशुपाल शोरी के संसदीय सचिव बनने से क्षेत्र में विकास की उम्मीदें भी बढ़ीं

विधायक शिशुपाल शोरी को शनिवार को राजधानी में संसदीय सचिव के रूप में शपथ दिलाई गई। शोरी के संसदीय सचिव बनने से कामकाज को लेकर जिलेवासियों व सरकार के बीच की दूरी और कम हो जाएगी। शिशुपाल को वनमंत्री मो अकबर के साथ परिवहन, आवास एवं पर्यावरण वन एवं विधायी कार्य विभाग में संलग्र किया गया है। इससे जिले के वनवासी क्षेत्रों के लोगों को लाभ तो मिलेगा ही साथ ही पर्यावरण के क्षेत्र में भी जिले के विकास की उम्मीद बढ़ गई है।
जिलेवासियों को उम्मीद है विधायक शिशुपाल को संसदीय सचिव बनाए जाने से उनकी समस्याओं का त्वरित निराकरण होगा। शिशुपाल शोरी का जन्म 8 अगस्त 1954 को कांकेर जिला मुख्यालय के निकट ग्राम पंचायत डुमाली में हुआ था। 1972 में नरहरदेव स्कूल से 12वीं तक की शिक्षा प्राप्त की।1983 में मध्यप्रदेश के उज्जैन विक्रम विश्वविद्यालय से स्नातक की उपाधि प्राप्त की। इसके बाद राज्य सेवा आयोग परीक्षा उत्तीर्ण कर प्रशासनिक सेवा में आए। 2007 में वे दंतेवाड़ा कलेक्टर बनाए गए। 2013 में आईएएस की नौकरी छोड़ दी। कांग्रेस का दामन थाम राजनीति में आ गए। 2014 में कांग्रेस से कांकेर लोकसभा के लिए टिकट मांगी। लेकिन टिकट नहीं मिली, फिर भी कांग्रेस के साथ काम करते रहे। उन्हें 2018 में कांग्रेस ने कांकेर से टिकट दिया। जीतने के बाद विधायक बने तथा दो साल के कार्यकाल में उनकी छवि शांत तथा सरल स्वभाव के राजनेता के रूप में रही।

कैबिनेट मंत्री का सहयोग करते हैं संसदीय सचिव
भारत में पहली बार संसदीय सचिव 1952 में भारत सरकार ने बनाया था। इसका उद्देश्य मंत्रिमंडल के कार्य में हाथ बंटाना था। संसदीय सचिव का प्रमुख कार्य कैबिनेट मंत्रियों के कार्य में सहायता करना है। वे कैबिनेट मंत्रियों के नेतृत्व में काम करते हैं। सदन में मंत्री की अनुपस्थिति होने पर नीतिगत सवालों के जवाब देते हैं। कार्यस्थगन कार्यवाही के दौरान वे एक मंत्री की ओर से बातचीत भी कर सकते हैं।



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