नक्सल प्रभावित इलाके में आदिवासियों की जिंदगी बचाने स्वास्थ्यकर्मी जान जोखिम में डाल रहे हैं। ऐसा ही एक नजारा शुक्रवार को पोलमपल्ली इलाके के अंदरूनी कोर्रापाड़ गांव में देखने को मिला।
यहां रहने वाली महिला कलमू दुले को प्रसव पीड़ा होने की सूचना चिंतागुफा में पदस्थ डॉ. मुकेश बख्शी को मितानिनों ने दी। इसके बाद एम्बुलेंस चालक दिलीप और आरएचओ सुनील कुमार को कोर्रापाड़ भेजा। दोनों कर्मचारी गांव से करीब चार किमी दूर कोर्रापाल नाले को उफनता देख रुक गए, लेकिन गर्भवती और उसके बच्चे की जान को खतरा होते देख वे अपनी जान जोखिम में डाल बारिश के बीच उफनते नाले को पार किया और गांव पहुंचे। इसके बाद महिला को एंबुलेंस में बिठाकर उसे चिंतागुफा के सरकारी हाॅस्पिटल में भर्ती कराया।
एंबुलेंस चालक दिलीप ने कहा कि हमें किसी भी हाल में महिला और उसके बच्चे की जान बचाने का आदेश मिला। इसका पालन करते हम अपनी जाम जोखिम में डालकर गांव पहुंचे थे। कलेक्टर चंदन कुमार ने कहा कि एंबुलेंस चालक और आरएचओ ने मानवता की मिसाल पेश की है। अन्य कर्मचारियों को उनसे प्रेरणा लेते हुए काम करना चाहिए।
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