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व्यापारियों ने नहीं मंगवाई चीन में बनी राखी, इस बार लौटीं पारंपरिक डिजाइन

3 अगस्त को रक्षाबंधन पर्व के लिए राखियों का बाजार सजने लगा है। बाजार में व्यापारियों ने इस बार चीन में बनी राखियां नहीं मंगाई है जो इस बार रक्षाबंधन पर्व पर सबसे बड़ा परिवर्तन है। पिछले कुछ सालों से बाजार में केवल चीनी राखियों की ही भरमार रहती थी। बाजार में चीनी राखियों का मार्केट शेयर 60 प्रतिशत तक पहुंच गया था। इस बार बाजार केवल स्वदेशी राखियों से गुलजार है। सालों पहले बिकने वाली ‘मेरे भैया’ ‘प्यारे भैया’ नाम वाली राखियां इस बार बाजार में दिख रहीं है।
कांकेर में हर साल राखियां सूरत, अहमदाबाद, दिल्ली, मुंबई के अलावा चीन से भी पहुंचती थीं। चीन में बनी राखियों का मार्केट शेयर तेजी से बढ़ता जा रहा था तथा 60 प्रतिशत बाजार पर उसका कब्जा हो गया था। गलवान हादसे के बाद चीन में बने सामानों का बहिष्कार होने लगा तो बाजार को भांपते स्थानीय व्यापारियों ने चीनी राखियों से परहेज किया। राखी व्यवसायी विकास हिरदानी ने कहा कि इस बार भी चीनी राखियां होलसेल में उपलब्ध है लेकिन गलवान घाटी हादसे के बाद लोगों में भारी नाराजगी है जिसके चलते चीन में बनी राखियां मंगाने का खतरा मोल नहीं लिया। राखी व्यवसायी पप्पू मोटवानी ने कहा कि प्रतिवर्ष चीन से लायटिंग वाली राखियों के अलावा बच्चों की राखियां पहुंचतीं थीं लेकिन इस बार जनभावना को देखते चीन में बनी राखियां नहीं मंगाई गईं हैं।
फिर बनने लगीं स्थानीय स्तर पर राखियां : चीन में बनी राखियों के दबदबे के कारण स्थानीय राखियों का बाजार समाप्त हो गया था। पिछले कुछ सालों से चीन में बने सामानों के बहिष्कार की उठती मांगों के चलते स्थानीय बाजार में राखियां तैयार होने लगीं हैं। प्रिंस ट्रेडर्स में5 सालों से राखी बनाने का काम किया जा रहा है। यहां स्थानीय महिलाएं मई माह से राखियां बनाने में जुटी हैं जिन्हें लॉकडाउन अवधि मेंप्रतिमाह 4500 रूपए वेतन भी मिला। इन राखियों की मांग कांकेर जिले के साथ दल्लीराजहरा, बालोद, नगरी, कोंडागांव में भी है। राखी बना रही भारती पटेल, अंजु पोया, प्रांजली नेताम, नीतू दर्रो, पुष्पा शोरी, संत कुरेटी ने कहा कि स्थानीय राखी बनने से उनको रोजगार मिल रहा है। प्रिंस ट्रेडर्स के संचालक मनीष देवनानी ने कहा कि एेसे कई उत्पाद हैं जिसमें प्रयास करने पर यहां के लोगों को स्वरोजगार मिल सकता है।

कीमतों में 20 प्रतिशत बढ़ोतरी
बाजार में राखी 5 से लेकर 500 रूपए तक की कीमत में उपलब्ध है। व्यापारियों ने कोरोना संक्रमण को देखते हर साल की अपेक्षा 25 प्रतिशत राखियों का स्टाक कम बुलाया है। इस साल राखियों की कीमतों में 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है। इस बार लॉकडाउन के कारण राखियों की खरीददारी करने दूसरे राज्य नहीं जा पाए। केवल रायपुर से ही राखियां खरीदी गईं हैं। राखी व्यवसायी अनिल सिंह ठाकुर, तिलक देवांगन ने कहा कि पूरी खरीददारी ऑनलाइन ही हुई है।
इस साल ये राखियां प्रचलन में
पहले फोम वाली राखियां प्रचलन में थी जो पिछले एक दशक से बाजार से गायब हो चुकी है। पहले बाजार कार्टून वाली चीनी राखियों से भरा पड़ा रहता था लेकिन इस बार बाजार में भगवान गणेश, कृष्ण के अलावा स्टोन आदि वाली राखियां पहुंचीं हैं। सालों पहले बिकने वाली राखियों में मेरे भैया लिखा रहता था जो गायब हो चुकी थी लेकिन इस बार ‘मेरे भैया’ ‘प्यारे भैया’ लिखी राखियां बाजार में पहुंची है।



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Traders did not order Rakhi made in China, this time returned to traditional design


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