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सातधार में मगरमच्छ ब्रीडिंग सेंटर विकसित करने वन विभाग ने भेजा प्रस्ताव

मगरमच्छों के संरक्षण को लेकर अब तक सुस्त रहे वन विभाग ने गंभीरता दिखाई है। सातधार में मगरमच्छ ब्रीडिंग सेंटर, बोधघाट मगरमच्छ पार्क के रूप में स्थापित करने का पहला प्रस्ताव उच्च स्तर पर भेजा गया है। यदि इस पर मुहर लगकर बड़ी प्लानिंग के साथ काम हुआ तो अफसरों का दावा है दंतेवाड़ा के सातधार में छत्तीसगढ़ का पहला मगरमच्छ ब्रीडिंग सेंटर होगा। यहां मगरमच्छों का संरक्षण होगा ही व पर्यटन को भी काफी बढ़ावा मिलेगा। इस संबंध में भास्कर ने भी 16 जुलाई के अंक में ‘इंद्रवती में बढ़ रहे मगरमच्छ, छिंदनार में अभयारण्य की प्लानिंग पर पहल नहीं’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी।
दरअसल, सातधार इलाके से मगरमच्छों का इलाका शुरू होता है। जो तुमनार तक माना जाता है। एक अच्छी बात और है कि न केवल मगरमच्छ बल्कि इंद्रावती में इसी इलाके में पाई जाने वाली बोध मछली के संरक्षण का भी प्रस्ताव में जिक्र है। जिसमें कहा गया है कि मगरमच्छों के संरक्षण के लिए बोध मछली का संरक्षण भी बेहद जरूरी है।
इसमें बाकायदा बजट के स्रोत का भी सुझाव दिया गया है। अब विभाग को मगरमच्छ और बोध मछली के संरक्षण के लिए भेजे गए प्रस्ताव के स्वीकृत होने का इंतजार है। क्योंकि संरक्षण के अभाव में मगरमच्छों के अलावा विशेष प्रजाति की बोध मछली भी तेजी से विलुप्त होती जा रही है। वन विभाग के गीदम एसडीओ शेखर स्वरूप ने भास्कर से चर्चा में बताया कि मगरमच्छ व बोध मछली दोनों के संरक्षण का प्लान है। प्रस्ताव बनाकर वाइल्ड लाइफ व उच्च स्तर पर भेजा गया है। स्वीकृति मिलने पर काम शुरू होगा। छत्तीसगढ़ में एक भी मगरमच्छ प्रजनन केंद्र नहीं है। स्वीकृति मिली तो यह पहला मगरमच्छ
प्रजनन केंद्र बनेगा।
वन विभाग के साथ प्रशासन को भी की जरूरत
प्रस्ताव में यह भी बताया गया है कि नदी के कुछ हिस्से से रेत निकाली जाती है जो इनके अस्तित्व के लिए खतरनाक है। क्योंकि मगरमच्छ नदी के किनारों पर रेत में करीब डेढ़ फीट गहराई में अंडे देता है, जो रेत निकालने की प्रक्रिया में नष्ट हो जाते हैं। रेत निकालने से शैवाल समाप्त हो रहे, जिससे मगरमच्छों का आहार बनने वाली छोटी मछलियों पर असर हो रहा। इस पर रोक लगाने वन विभाग के साथ प्रशासन को भी मिलकर काम करना होगा। विभाग के अफसरों ने यहां रिसर्च भी की थी, जिसमें पाया कि मगरमच्छ प्रतिरोधक क्षमता के बलबूते ही बचे हैं।
मगरमच्छ व बोध मछली दोनों के संरक्षण के लिए पहल
बोधघाट सातधार का इलाका पर्यटक स्थल है। मगरमच्छ, बोध मछली के अलावा कई प्रकार के जलचर व पशु पक्षियों से यह क्षेत्र परिपूर्ण माना जाता है। जिसे इको टूरिज्म स्पॉट के रूप में विकसित किया जा सकता है। यह क्षेत्र भैरमगढ़ अभयारण्य की सीमा से लगभग 10 किमी दूर है, इंद्रावती टाइगर रिजर्व भी समीप है। इस क्षेत्र को क्रोकोडाइल पार्क बनाकर भैरमगढ़ व इंद्रावती टाइगर रिजर्व से जोड़ा जाना चाहिए।



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Forest department sent proposal to develop crocodile breeding center in Satadhar


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