निजी शिक्षण संस्थानों के संचालकों व प्राचार्यों ने 21 जुलाई को कोरोना संक्रमण में स्कूल संचालन में आ रही समस्याओं को लेकर बैठक की। बैठक में पूरे जिले के सभी निजी स्कूलों के संचालक व प्राचार्य पहुंचे। बैठक के बाद जिला प्रशासन को सौंपे ज्ञापन में निजी स्कूलों को राहत के रूप में पैकेज देने की मांग की गई।
जिले में निजी स्कूल की संख्या 158 है तथा इस निजी स्कूलों में 50 हजार छात्र छात्राएं पढ़ाई कर रहे हैं। निजी स्कूलों में 5 हजार शिक्षक-शिक्षिकाएं तथा अन्य कर्मचारी काम करते हैं। इस वर्ष मार्च में लॉकडाउन के बाद निजी स्कूलों की आर्थिक स्थिति खराब हो चुकी है। लॉकडाउन लगने के बाद वे पालकों से कोई शुल्क नहीं ले पा रहे हंै। शुल्क नहीं लेने से निजी स्कूलों पर आश्रित परिवारों की आथिक स्थिति चरमरा गई है और परेशानी के दौर से गुजर रहे हैं। निजी स्कूल संचालकों ने कहा निजी स्कूल के शिक्षक ऑनलाइन क्लास ले रहे हैं और
मेहनत कर रहे हैं। इस कारण निजी स्कूल के शिक्षकों को वेतन दिया जाना जरूरी है लेकिन शासन ने पालकों से फीस लेने पर पाबंदी लगा रखी है। स्कूलों में फीस जमा नहीं होने से शिक्षकों का वेतन नहीं दे पा रहे हैं।
स्कूलों में चलने वाली बसें फाइनेंस पर हैं जिनकी किश्त प्रतिमाह बैंक को देनी पड़ती है। स्कूलों में पैसे नहीं आने से किश्त जमा नहीं कर पा रहे हैं। वाहनों का बीमा, रोड टैक्स, फिटनेस, परमिट शुल्क विगत पांच माह से बकाया है। आगे भी भुगतान करना संभव नहीं है। लॉकडाउन अवधि का रोड टैक्स, बीमा, परमिट, वाहन किश्त माफ की जाए। कई स्कूलों का संचालन किराए के भवन में हो रहा है। मकान मालिक द्वारा किराया मांगा जा रहा है लेकिन फीस नहीं आने से किराया पटाना भी संभव नहीं हो पा रहा है।
ज्ञापन सौंपने निजी स्कूल संचालक दिलीप घोडख़ांदे, भुनेश्वर सिंह साहू, दिंगबर सिंह चौहान, गौतम विश्वकर्मा, ललिता साहू, अमोल बेदलकर, विवेक गुप्ता, चमलेश चुरगैया, गितेश्वर पटेल, नवनीत शर्मा, विक्रांत वासनिकर सुमित जायसवाल, चैनसिंह बघेल, भूपेंद्र साहू, धमेंद्र दुबे पहुंचे थे।
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