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श्रमिक संगठनों ने प्रदूषण के विरोध में किया प्रदर्शन

मंगलवार की सुबह कुछ संगठनों प्रदूषण के खिलाफ नाराजगी जाहिर की। संगठनों ने हाथों में कार्ड बोर्ड व स्लोगनबोर्ड लेकर लाइन वन से लाइन टू जाने वाले रास्ते के बीच माटी गेट के समक्ष शांतिपूर्ण तरीके से धरना व प्रदर्शन किया। आंदोलन से फैक्ट्री के अंदर से निकलने व अंदर जाने वालों को परेशानी हुई।
अांदोलन के बाद डीसीबीएल प्रशासनिक अमला हरकत में आया व संलग्न विभाग के अधिकारियों से बातचीत कर समस्या का समाधान करने की बात कही। डीसीबीएल पूर्वांचल उत्पादन प्रमुख सुनील कुमार गुप्ता ने कहा कि सीमेंट उद्योग देश के चुनिंदा क्षेत्रों में से एक है, जिसे प्लास्टिक जैसे कूड़ा और औद्योगिक अपशिष्ट पदार्थों को वैकल्पिक ईंधन के रूप में व्यवहार करने के लिए सरकार की तरफ से अनुमति मिली है। इससे कोयला जैसे जीवाश्म ईंधनों का उपयोग कम होने के साथ साथ कार्बन डाइऑक्सइड (CO2) उत्सर्जन भी कम हो जाता है। ये वैकल्पिक ईंधन विभिन्न उद्योगों और अन्य क्षेत्रों के नगर पालिका से यहां लाया जा रहा है। अभी चल रही बारिश और अधिक नमीयुक्त मौसम से कभी कभी उसमें हल्की गंध आने का संभावना रहती है।
बहुत जल्द इस मुद्दे को हल करने के उपाय शुरू कर दिए हैं। ओडिशा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का एक टीम यहाँ आकर वैकल्पिक ईंधन सामग्री को संभालने के लिए हमारी संयंत्र में लिए गए सारे पहल का दौरा कर नियंत्रण उपायों पर हमारा मार्गदर्शन भी किया है। ओडिशा प्रदूषण नियंत्रण निगम के क्षेत्रीय पदाधिकारी प्रकाश कुमार महापात्र के अनुसार उनकी टीम ने बबिता सिंह के नेतृत्व में बीते दिनों ही डीबीसीएल का दौरा किया। वे स्थानीय कचरा व अन्य ईंधन का उपयोगकर वातावरण को स्वच्छ रखने का प्रयास कर रहे हैं, किंतु बारिश के दिनों में उसके खुले में रहने से और बिना सूखे ईंधन का प्रयोग करने से कुछ दुर्गंध आने की आशंका है। उन्हें तारपोलिंग वगैरह ढंककर इस ईधन का इस्तेमाल करने के लिए कहा गया है।



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Labor organizations protest against pollution


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