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खेतों की मेड़ पर लगा रहे अरहर ताकि हो जल संरक्षण

जिले के 54 गांव में 1500 किसानों ने धान के साथ ही अन्य फसलों की खेती को बढ़ावा देते हुए अपनी आय और जल संरक्षण को ध्यान में रखकर पहली बार खेतों और तालाब की मेड़ पर अरहर लगा रहे हैं। नई पहल के तहत पहली बार 2800 एकड़ में की जा रही इस खेती का फायदा किसानों को बड़े पैमाने पर मिलेगा। इसके माध्यम से जल का संरक्षण के साथ अन्य फसलों की खेती कर इसका दोहरा फायदा ले सकेंगे। इस कवायद का फायदा गोठान के आस पास रहने वाले किसानों को आगामी सालों में मिले इसके लिए किसानों को कृषि विभाग के द्वारा अरहर के बीज मुफ्त में दिया गया है। पहले चरण में शुरू हुए योजना को कृषि विभाग के अधिकारी हरित क्रांति विस्तार व राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत संचालित होगा।
सहायक संचालक विकास साहू ने कहा कि यह कवायद जिले में धान के साथ ही अन्य फसलों की खेती का रकबा बढ़े और जल संरक्षण को लेकर की जा रही है ताकि किसानों को पानी की समस्या से निजात मिल सके। योजना से जुड़ने वाले किसानों को इस फसल की खेती करने में कोई परेशानी न हो इसके लिए बीज मुफ्त में दिया गया है। पहली चरण में उन गांवों का चयन किया गया, जहां नरवा, गरवा योजना के तहत गोठान बना है।
एक साथ तीन फायदा लेंगे किसान
जल संरक्षण के लिए किसानों ने यह निर्णय लिया है कि वे सभी अपने-अपने खेत और गांव के तालाब तथा व्यक्तिगत तालाब की मेड़ पर बारिश में अरहर लगाएंगे और उसका उत्पादन लेंगे । किसान तुलाराम, सुकमन, आयतू, सुकुलधर आदि किसानों ने कहा कि इस तरह से मेड़ों में अरहर लगाने से जहां मिट्टी का कटाव कम होगा तो वहीं दूसरी ओर फसल की पैदावार में बढ़ोत्तरी होगी। इस तरह से किसानों को एक साथ तीन फायदा होगा। जिसमें खेतों व तालाबों में पानी रुकेगा, मिट्टी का कटाव कम होगा और मेड़ पर फसल भी होगी।

पत्तियों से खाद भी तैयार होगी
किसानों ने कहा कि हम सब मिलकर आने वाले समय में हर खेत और तालाब की मेड़ पर अरहर के पौधे लगाएंगे। जिससे हमारा गांव भी हरा-भरा होगा खेत में नमी रहेगी, पत्तियों से खाद भी तैयार होगी इसके अलावा मेड़ बंधान से पर्यावरण की सुरक्षा भी होगी। ज्ञात हो कि अरहर की पत्तियों को सडा़कर इससे खाद बनाई जाएगी जिसका उपयोग करना खेती के लिए फायदेमंद होगा।



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Arhars are being planted on the back of the fields to conserve water


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