शहर के एसआरएलएम सेंटर में अब गोबर से जैविक खाद बनाई जा रही है, जिसे किसानों के साथ ही संस्थाओं व अन्य लोगों को उनकी मांग के अनुसार 8 रुपए प्रति किलो के रेट पर बेचा जाएगा। गोबर के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई गोधन न्याय योजना में आने वाले दिनों में शहर के चार एसआरएलएम सेंटर में खाद, अगरबत्ती, कंडे समेत अन्य सामान बनाए जाएंगे। बाहर से प्रशिक्षक बुलाकर समूह की महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
महिलाओं को इस सामान को बनाने के लिए मशीनें उपलब्ध करवाई जाएंगी। आयुक्त प्रेम कुमार पटेल ने कहा कि इस समय शहर में चार जगहों पर एसआरएलएम सेंटर के जरिए गोबर की खरीदी की जा रही है, जहां पर फिलहाल वर्मी कंपोस्ट बनाया जा रहा है। आने वाले दिनों में गोबर से कंडा के साथ ही अगरबत्ती, दिए समेत अन्य सामान बनाया जाएगा। इस योजना को सफल बनाने के लिए महिला समूहों की महिलाओं से बात की जा रही है।
होटल और श्मशान में कंडे का होगा उपयोग
निगम महिला समूहों द्वारा संचालित किए जाने वाली इस योजना में सबसे ज्यादा तवज्जो गोबर को लकड़ी की शक्ल में बनवाने में दे रहा है। आयुक्त के साथ ही अन्य अधिकारियों ने कहा कि गोबर से तैयार लकड़ी काे होटलों व ढाबों के अलावा अंतिम संस्कार में भी उपयोग में लाई जा सकेगी। गौरतलब है गोबर से लकड़ी बनाने के लिए निगम हरियाणा से मशीन मंगवाएगी। आयुक्त ने कहा कि हरियाणा से जिस मशीन को मंगवाने की योजना बनाई गई है। वह मशीन कम सूखे गोबर से कंडा बनाती है। इसे सूखाकर ईंधन के रूप में प्रयुक्त किया जा सकता है। बारिश के दिनों में इसका उत्पादन कम होगा, लेकिन ठंड एवं गर्मी के मौसम में इसका उत्पादन बढ़ जाएगा।
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