इस साल 22 अगस्त से मनाए जाने वाले गणेशोत्सव पर भी कोरोना का असर पड़ रहा है। हर्षोल्लास से मनाए जाने वाले गणेशोत्सव की तैयारी कई महीने पहले से शुरू हो जाया करती थी, लेकिन इस साल अधिकतर मूर्तिकार खाली बैठे हैं। मूर्तिकार कुबेर गुप्ता ने बताया कि मई से बुकिंग की शुरुआत हो जाती थी। कई बड़ी समितियों के पदाधिकारी ऑर्डर दे देते थे, लेकिन इस वर्ष अभी तक एक भी ऑर्डर नहीं मिला है। प्रतिमा बनाने के लिए लकड़ी, पैरा, मिट्टी, श्रृंगार सामग्री खरीदनी पड़ती है, मजदूरों को रोजी देनी पड़ती है। ऐसे में अगर आने वाले दिनों में अनुमति नहीं मिलती है तो भी ऑर्डर के अनुसार मूर्तियां बनाना संभव नहीं है। समितियां कोरोना के चलते 5 फीट से ज्यादा ऊंची प्रतिमा की स्थापना नहीं करने के नियम होने से अब तक ऑर्डर देने नहीं आए हैं।
उन्होंने कहा हर साल एक दर्जन बड़ी गणेश प्रतिमाएं वे खुद बनाते थे लेकिन अब तक इसकी शुरुआत नहीं हो पाई है। वहीं पथरागुड़ा इलाके में रहने वाले मूर्तिकार पुरुषोत्तम ने कहा कि ऑर्डर नहीं मिलने के बाद छोटी प्रतिमाओं का निर्माण कर रहे हैं। उम्मीद है कि लोग छोटी मूर्तियों की स्थापना घरों में करेंगे। जगदलपुर में 13 मूर्तिकारों द्वारा प्रतिमाओं का निर्माण किया जाता है कहीं भी बड़ी प्रतिमा नहीं बनाई गई हैं।
कई समितियां अब तक नहीं ले पाई निर्णय तो कुछ ने कहा- घर में स्थापित करेंगे प्रतिमा
कोरोना के चलते विघ्नहर्ता भगवान गणेश की प्रतिमा निर्माण में भी विघ्न पड़ गया है। भव्य पंडाल में गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की विशाल प्रतिमा विराजित करने वाली समितियां अब तक प्रतिमा का स्वरूप ही तय नहीं कर सकी हैं। संजय बाजार गणेशोत्सव समिति के सदस्य पंकज सिंघल ने कहा कि इस साल कोरोना के चलते गणेशोत्सव भव्य रूप में मनाया जाए या नहीं, इसका निर्णय अब तक नहीं हो सका है। उम्मीद है कि यदि गणेशोत्सव मनाया भी जाता है तो यह केवल प्रतीकात्मक रूप में होगा। वहीं बालाजी गणेश युवा समिति के उपाध्यक्ष राजा तिवारी ने कहा कि इस साल समिति द्वारा पंडाल में गणेश प्रतिमा स्थापित नहीं की जाएगी। यह परंपरा भंग न हो इसलिए समिति से जुड़े किसी सदस्य के घर में समिति के नाम से गणेश प्रतिमा स्थापित करवाकर पूजा पाठ कराया जाएगा।
छोटी प्रतिमाएं भी कब और कहां बिकेंगी, यह भी तय नहीं
जिले में करीब 30 लोग अलग-अलग समूहों में मूर्ति बनाने का काम करते हैं। गणेशोत्सव के लिए यहां करीब दो हजार से अधिक मूर्तियां बनाई जाती हैं। एक बड़ी मूर्ति की कीमत 10 से 25 हजार रुपए तक होती है। जबकि छोटी मूर्ति 500 से लेकर 5000 रुपए में बिकती है। एक अनुमान के मुताबिक यहां हर साल 10 से 15 लाख रुपए का कारोबार होता है, लेकिन कोरोना ने इसे पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। गणेश भगवान की छोटी प्रतिमाएं इस साल कहां बिकेंगी इसकी जगह अब तक नगर निगम के अधिकारी तय नहीं कर पाए हैं। निगम आयुक्त प्रेम कुमार पटेल ने बताया कि इस मामले संबंध में जल्द ही राजस्व विभाग के अधिकारियों से चर्चा कर स्थान का निर्धारण किया जाएगा।
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