धनंजय शर्मा | बड़गांव क्षेत्र में विगत डेढ़ महीने से बारिश नहीं होने के कारण किसान परेशान हैं। धान की रोपाई, बियासी जैसे कार्य ठप पड़ गए हैं। इससे हताश होकर अंचल के 60 से अधिक गांव के किसान बुधवार को मदले गांव स्थित किनार खुटा देव स्थल के पास पानी के लिए विनती की। मान्यता है कि किनार खुटा देव के पास श्रद्धा और विश्वास पूर्वक की गई प्रार्थना कभी खाली नहीं जाती।
दूर-दूर गांव से आए किसान देव स्थान पर एकत्र हुए, किनार खुटा देव के आंगा देव के आगे विनती की। पुजारियों पर सवार देवताओं ने मोडे मरका में उस स्थान के उपेक्षा की बात सामने आई।
प्राचीन देव स्थल है मोडे मरका
मोडे मरका उसेह मुदिया का मुख्य देव स्थान है, जो कोयलीबेड़ा से 15 किमी घनघोर जंगल के बीच बसा है। इस स्थान पर आज से 15-20 साल पहले हमेशा श्रद्धालुओं का लगातार आना जाना होता रहता था। धीरे-धीरे इस स्थान पर सालभर में केवल एक बार बैठक होती है।
सात साल में एक बार होता है करसाड़
मोडे मरका स्थान पर दैविक मान्यताओं के अनुसार सात साल में एक बार जात्रा होता है, जिसे करसाड़ भी कहते हैं। जिसमें हजारों लोग जुटते हैं। लेकिन अब के दिनों में यहां रोज देव को मानने वाले नहीं पहुंच पाते। लोग मानते हैं कि इसका खामियाजा अब प्राकृतिक आपदा के रूप में सामने आ रही है। इसमें बरसात का नहीं होना मुख्य कारण बताया जा रहा है।
आदिवासियों को उम्मीद बेकार नहीं जाएगी पूजा
ग्रामीण फागुराम आंचला (चलुंन दार), गायता सुक्कू राम, गज्जूराम पोटाई, घस्सू राम उसेंडी, बंशीराम आंचला, रूप सिंह पोटाई, मनीराम उसेंडी, मेशो राम दर्रो (कुहचे) ने कहा कि आदिवासी प्रकृति का पूजक है, उसका हर कार्य देवी-देवताओं की मान्यता पर आधारित है। वर्षा का होना ना होना मूलत: प्रकृति की देन है, लेकिन जहां आस्था और विश्वास है, वहां उसी के अनुसार मान्यताएं बनती हैं। मदले के देव स्थल पर उपस्थित किसानों ने अपनी व्यथा अपने ईष्ट देव के समक्ष रखी है, उन्हें उम्मीद है कि उनकी विनती बेकार नहीं जाएगी, क्योंकि उनका आस्था अटूट है।
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