ग्राम जरकेला में किसानों के खेत के नजदीक तक सिंचाई नाली बन जाने से सिंचाई की समस्या दूर हो गई और पूरे साल फसल लहलहाने लगी है। अब किसान धान के अलावा मसूर, चना, मटर सब्जी की खेती करने लगे हैं, जिससे उनकी स्थिति मजबूत हुई है।
जिला मुख्यालय अंबिकापुर से 50 किलोमीटर की दूरी पर सरगुजा एवं जशपुर जिले के सीमा पर स्थित ग्राम जराकेला, लुण्ड्रा विकासखंड अंतर्गत आता है। यह ग्राम चारों ओर से जंगलों एवं पहाड़ी से घिरा हुआ है जिसकी वजह से बारिश के पानी का ठहराव नहीं होने के कारण बहकर नालों के माध्यम से अन्य गांवों के नदी एवं बांध में चला जाता था। इससे जल स्रोतों के भू-जल स्तर में कमी आ जाती थी, ऐसे में गर्मी के मौसम में खेतों तक पानी मिलना और लगी फसलों, साग-सब्जियों को बचाना मुश्किल हो जाता था। जराकेला में खेती की जमीन 100 एकड़ है तथा गांव की आबादी 2 हजार 500 और महात्मा गांधी नरेगा के जॉब कार्ड धारी परिवारों की संख्या 264 हैं। गांव में खेती-किसानी का रकबा काफी होने के बाद भी पानी की कमी के कारण किसान पर्याप्त फसल नहीं ले पाते थे। इस पर ग्राम सभा में सबके सामने सिंचाई नाली निर्माण के फायदे को बताया गया। इसके बाद ग्राम पंचायत के प्रस्ताव के आधार पर ग्राम पंचायत में सिंचाई नाली निर्माण की प्रशासकीय स्वीकृति 07 जून 2018 को दी गई। 15 फरवरी 2019 को ग्राम पंचायत सरपंच एवं सचिव और ग्रामीणों की उपस्थिति में सिंचाई नाली निर्माण का कार्य प्रारंभ किया गया। महात्मा गांधी नरेगा से एक सिंचाई नाली निर्माण हुआ। अब उनके पास अपनी फसलों को सूखने से बचाने के लिए खुद का पानी का संसाधन है। सिंचाई नाली होने से अब वे बाड़ी से अपने परिवार का गुजर-बसर कर पा रहे है।
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