कोरोना वायरस का सीधा असर इस साल गणेशोत्सव पर भी पड़ेगा। शहर में स्थानीय तथा बाहर से पहुंचने वाले 15 मूर्तिकार छोटी बड़ी मिलाकर 1500 मूर्तियां बनाते थे। 6 महीने पहले बड़ी मूर्तियों के ऑर्डर मिल जाते थे। वहीं तीन महीने पहले से ही बाहर के मूर्तिकार डेरा डाल मूर्तियां बनाना शुरू कर देते थे। गणेशोत्सव को अब केवल डेढ़ महीने बचे हैं लेकिन अब तक ना तो किसी मूर्तिकार को बड़ी मूर्ति बनाने आर्डर मिला और ना ही बाहर से मूर्तियां बनाने कांकेर में अब तक कोई मूर्तिकार पहुंचा है। इस बार अभी तक एक भी बड़ी या मध्यम मूर्ति बनाने की बुकिंग नहीं आई है। इसके कारण स्थानीय मूर्तिकार भी ऑर्डर नहीं मिलने से बड़ी मूर्तियां नहीं बना केवल छोटी मूर्तियां तैयार कर रहे हैं।
कांकेर शहर के साथ ग्राम पंडरीपानी, नंदनमारा में भगवान गणेश की मूर्तियां बनाने मूर्तिकार बाहर से आकर तीन महीने पहले डेरा डालते थे। हर साल मूर्ति बनाने धमतरी, बालोद के अलावा पंखाजूर से भी मूर्तिकार पहुंचते थे। अभी तक बाहर से मूर्तिकार नहीं पहुंचे हैं। बाहर से शहर में पहुंचने वाले मूर्तिकार गणेशोत्सव के तीन महीने पहले पहुंचते तथा गणेशोत्सव के बाद दुर्गा उत्सव के लिए मूर्तियां बनाने के बाद दीपावली के पहले वापस अपने गांव लौटते थे।
10 जून से शुरू कर देते थे मूर्ति बनाना
ग्राम नंदनमारा के मूर्तिकार बादल यादव ने कहा 10 जून से हर साल भगवान गणेश की मूर्ति बनाना शुरू कर देते थे। ग्राम पंडरीपानी के मनीराम यादव ने कहा इस बार अभी तक मूर्ति बनाना शुरू नहीं किया है। अभी तक एक भी मूर्ति की बुकिंग नहीं आई है।
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