कोरोना इलाके में तेजी से फैल रहा है। शुक्रवार देर शाम तक जगदलपुर शहर में 17 नए मरीज आ चुके थे। इनमें मेडिकल कॉलेज के तीन स्टाफ, महारानी हॉस्पिटल के दो स्टाफ और अन्य लोग शामिल हैं। इसी तरह कोडागांव में 23 नए पॉजिटिव मरीज मिले हैं। इनमें 21 लोग फरसगांव के बानगांव क्वारेंटाइन सेंटर के हैं ये सभी प्रवासी मजदूर हैं। देवखरगांव के सीआरपीएफ कैंप से एक जवान और माकड़ी क्वारेंटाइन सेंटर से एक मरीज सामने आया है।
इधर मेकॉज के बाद अब कोरोना महारानी हॉस्पिटल पहुंच गया है यहां रेडियाेलॉजी डिपार्टमेंट का एक कर्मचारी, स्टोर में काम करने वाला एक कर्मचारी और परिवार के दो सदस्य भी पॉजिटिव हैं। तत्काल बाद 20 ऐसे कर्मचारियों को भी ट्रेस कर लिया गया है जो प्राइमरी कांटेक्ट में आए थे। सभी को सेल्फ क्वारेंटाइन किया गया है और कोरोना टेस्ट करवाया जा रहा है। हॉस्पिटल के सिविल सर्जन विवेक जोशी भी सेल्फ क्वारेंटाइन हो गए हैं। उन्होंने बताया कि एहतियात के तौर पर तीन दिन के लिए बाह्य रोग ओपीडी, स्टोर, एक्स-रे डिपार्टमेंट, ऑपरेशन थियेटर सहित वार्डों को बंद किया जा रहा है। यहां भर्ती मरीजों को सेहत के हिसाब से डिस्चार्ज दिया जा रहा है और अभी नए मरीजों को बेहद जरूरी होने पर ही भर्ती किया जाएगा। आपातकाल में डाॅक्टर तैनात रहेंगे। इधर नयापारा में कुछ इलाके सील कर दिए है।
सर्जरी डिपार्टमेंट बंद, महारानी हॉस्पिटल में भी बेड नहीं, गंभीर अवस्था में कर रहे रेफर
इधर मेकॉज के सर्जरी डिपार्टमेंट को बंद कर दिया गया है और आदेश जारी किया गया है कि सर्जरी डिपार्टमेंट के मरीजों को महारानी हॉस्पिटल या किसी हायर सेंटर में रेफर कर दिया जाए। इधर महारानी हॉस्पिटल में सर्जरी वार्ड में बेड फुल हैं। ऐसे में मरीजों को मेकॉज में न महारानी हॉस्पिटल में इलाज मिल पा रहा है और वे इलाज के लिए भटक रहे हैं। दो दिन पहले भी मेकाज में एक सर्जरी से संबंधित गंभीर अवस्था में मरीज पहुंचा। इस मरीज को प्रबंधन ने भर्ती करने से इंकार कर दिया। इसके बाद आपातकाल में बैठे डाॅक्टर ने मरीज की हालत को देखते हुए अपने रिस्क पर उसे एक वार्ड में भर्ती किया और उसका इलाज किया।
डॉक्टर, नर्स सहित 192 स्टाफ ने प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोला
इधर मेडिकल कॉलेज के डाॅक्टरों, स्टाफ नर्सों, वार्ड ब्वाय, आया, स्वीपर ने अब प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। करीब 192 से ज्यादा स्टाफ ने लिखित में बस्तर कमिश्नर से शिकायत की है। शिकायत में कहा गया है कि मेकॉज प्रबंधन ने कोरोना को गंभीरता से ही नहीं लिया। प्रबंधन की लापरवाही की वजह से हॉस्पिटल परिसर समेत यहां की रहवासी कॉलोनी में कोरोना फैलने का खतरा बना हुआ है। स्टाफ का कहना था कि पूरे परिसर में हर वक्त डेढ़ से दो हजार लोग रहते हैं जिनमें मरीज भी शामिल हैं। प्रबंधन की लापरवाहियों की वजह से ये सभी कोरोना की चपेट में आ सकते हैं। कमिश्नर को सौंपे गए पत्र में करीब 9 बिंदू बनाए गए हैं। जिनमें ये पहले प्वाइंट में कहा गया है कि नान कोविड हॉस्पिटल में संक्रमण से बचाव के लिए उठाए गए कदम गलत हैं जिससे पूरे परिसर में कोरोना फैलने का खतरा बना हुआ है। इसके अलावा कोरोना संदिग्ध मरीजों को नान कोविड वार्ड में ही इलाज के लिए भर्ती किया जा रहा है। यही नहीं उनकी सैपलिंग भी यहीं करवाई जा रही है जबकि ऐसे मरीजों को कोविड हॉस्पिटल में भर्ती किया जाना चाहिए। सबसे बड़ी लापरवाही यह है कि 8 दिन पहले जब सर्जरी विभाग में एक कोरोना मरीज मिला तो इस वार्ड को सील नहीं किया गया बल्कि यहां इलाज जारी रखा गया। यही नहीं, पॉजिटिव मरीज के संपर्क में आने वाले कर्मचारियों को मेकॉज परिसर में क्वारेंटाइन कर दिया गया है जो बेहद गंभीर है। यही कारण है कि हॉस्पिटल में कोरोना फैला। इसी तरह मेडिसिन वार्ड में कोरोना के लक्षण वाले मरीज को भर्ती किया गया इसका इलाज यहीं किया गया। रात में मरीज के पॉजिटिव आने के बाद भी उसे कोविड हॉस्पिटल में शिफ्ट न करते हुए वार्ड में सुबह तक रखा गया।
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