ग्राम कुरना के ग्रामीण युवाओं ने कलेक्टोरेट पहुंच शिकायत करते कहा कि भूमाफिया बालाजी मंदिर की जमीन को तहसील कार्यालय से कम कीमत में नीलामी में लेकर बड़े किसानों को ऊंची कीमत में खेती करने दे रहे हैं। गांव के भूमिहीन मजदूर किसानों को खेती करने के लिए जमीन नहीं मिल पा रही है। युवाओं ने कहा कि मंदिर की खेती गांव के भूमिहीन मजदूरों को खेती करने के लिए दी जाए।
ग्राम कुरना के युवक 1 जुलाई को कलेक्टोरेट पहुंचे तथा बालाजी मंदिर की जमीन को लेकर होने वाली नीलामी की शिकायत की। ग्रामीणों के अनुसार बालाजी मंदिर के नाम पर ग्राम कुरना में 55 से 65 एकड़ कृषि भूमि है। उक्त भूमि प्रतिवर्ष कृषि कार्य हेतु तहसील कार्यालय से नीलाम की जाती है। नीलामी में ग्राम कुरना का भूमाफिया संलिप्त है तथा कम कीमत में बोली लेकर खेतों को ले लेते हैं। इस जमीन में वे स्वयं खेती नहीं करते तथा गांव के बड़े किसानों को ऊंची कीमत में किराए पर देकर मुनाफा कमाते हंै। भू माफिया संगठित होकर रिंग बनाकर बोली लगाते हैं। मंदिर की कृषि भूमि को इस वर्ष मात्र 90 हजार में एक व्यक्ति ने लिया तथा दूसरे किसानों को टुकड़ों में अलग अलग कर 7 लाख रूपए में किराए पर दे दिया। युवकों ने इस वर्ष की नीलामी रद्द कर दुबारा नीलामी में गांव के भूमिहीन किसानों को भी अवसर देने की मांग की है। यह मांग कुरना से पहुंचे युवा अजय जुर्री, सुनील मौर्य, मनोज जुर्री आदि ने की।
पहले की गई शिकायत पर कार्रवाई नहीं
गत वर्ष भी 24 जुलाई 2019 को गांव के लोगों ने कलेक्टर से शिकायत की थी। शिकायत के बाद जांच कराई गई जिसमें शिकायत सही पाई गई थी इसके बावजूद इस साल फिर से उसी प्रकार की गड़बड़ी हुई। गत वर्ष गांव के ही एक बड़े किसान ने मंदिर की जमीन को 94 हजार में लिया था तथा उसे टुकड़ों में दूसरे किसानों को खेती करने देकर मुनाफा कमाया था।
भगवान जगन्नाथ की जमीन किसानों को दी गई
ग्राम हाटकोंगेरा में भगवान जगन्नाथ मंदिर की 35 एकड़ खेती जमीन है। पहले यह भी भूमाफिया के हाथों जाती थी। इस वर्ष पंचायत सामने आई तथा स्वयं बोली लगाकर जमीन किराए पर ली। इसके बाद गांव के भूमिहीन किसानों को खेती के लिए साधारण दरों पर किराए पर दी गई। इससे गरीबों ही नहीं, मंदर को भी फायदा हुआ।
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