जशपुर के एनईएस कॉलेज ग्राउंड में बन रहे हॉकी एस्ट्रो टर्फ के लिए टर्फ जशपुर पहुंचा चुका है। इसे ग्राउंड के बाहर सड़क किनारे छोड़ दिया गया है। पीडब्लूडी अधिकारियों का कहना है कि अब एस्ट्रोटर्फ का निर्माण आगे बढ़ाया जाएगा। पहले मैदान का बेस लेबल तैयार करना है। इसके बाद इसमें टर्फ बिछाने का काम किया जाएगा। टर्फ का आर्डर पहले ही दिया जा चुका था। लॉकडाउन के कारण सामान नहीं पहुंच पाया था।
जशपुर को हॉकी की नर्सरी भी कहा जाता है क्योंकि यहां से निकले खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। एस्ट्रोटर्फ के निर्माण के लिए वर्ष 2018 में केन्द्र सरकार ने 5 करोड़ 44 लाख रुपए की मंजूरी दी थी। पर पीडब्लूडी विभाग द्वारा टेंडर में देरी की गई। एस्ट्रोटर्फ के निर्माण के लिए वर्ष 2018 में ही भूमिपूजन कर लिया गया था। वैसे शहर में एस्ट्रोटर्फ का निर्माण 20 साल पहले भी शुरू हुआ था। 2001 में तात्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी के कार्यकाल में इसका निर्माण शुरु हुआ था। पर तकनीकी कारणों से यह काम अधूरा में ही बंद हो गया था। जिसके बाद यहां के निवासियों, जनप्रतिनिधियों व खिलाड़ियों ने समय-समय पर इसकी मांग उठाई। पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह द्वारा दो बार इसकी घोषणा की गई थी। पर इसका निर्माण शुरु नहीं हो पा रहा था। जिसके बाद तात्कालीन कलेक्टर डॉ. प्रियंका शुक्ला व स्थानीय जनप्रतनिधियों के प्रयास से वर्ष 2017 में खेल विभाग ने एस्ट्रोटर्फ हॉकी स्टेडियम के प्राक्कलन तैयार कर खेल विभाग को भेजा था। इस प्रस्ताव में सिंथेटिक एस्ट्रोटर्फ के साथ मैदान में सिंचाई के लिए संपवेल, स्प्रिंकलर सिस्टम, दर्शक दीर्घा और बाउंड्रीवाल की मरम्मत के साथ दर्शकों के लिए सौ कुर्सी लगाने का प्रावधान किया गया था। खेल विभाग द्वारा इस प्रस्ताव का परीक्षण के बाद स्वीकृति के लिए वित्त विभाग भेजा गया था। जहां से स्वीकृति मिलने के बाद प्रस्ताव केंद्र सरकार के पास गया। जिस पर केंद्र सरकार ने अपनी मुहर लगा दी थी।
2000 में आया था पहला प्रस्ताव - जिले में एस्ट्रोटर्फ हॉकी मैदान का सबसे पहला प्रस्ताव सन 2000 में आया था। उस वक्त केंद्र की एनडीए सरकार में केंद्रीय मंत्री उमा भारती से पूर्व सांसद दिलीप सिंह जूदेव ने मुलाकात कर जशपुर जिले के लिए इसकी मांग रखी थी।
आगे बढ़ाया जाएगा काम
"टर्फ के आ जाने के बाद अब एस्ट्रोटर्फ का काम तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा। सरकार को इसके लिए आवंटित राशि वापस नहीं किया गया है। अभी सिर्फ 2 प्रतिशत काम हुआ है।''
-केआर दर्शयाम्कर, ईई, पीडब्लूडी
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