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ग्रामीण एकजुट हुए तो नक्सलगढ़ में बना आश्रम, इस साल से होगी पढ़ाई

ये धुर नक्सलगढ़ गांव गुमियापाल का 50 सीटर आश्रम भवन है। अभी काम अंतिम चरण पर है। खासियत ये है कि यह अंदरूनी गांवों का पहला स्लैब वाला सबसे बड़ा आश्रम भवन है। इसे बनाने न तो कैंप खोला गया न ही फोर्स पहुंची बल्कि इस गांव में यह तब बन सका, जब पूरा गांव बच्चों की पढ़ाई के लिए नक्सलियों के खिलाफ एकजुट हुआ।
ग्रामीण बताते हैं कि नक्सलियों ने इसे रोकने की भी कोशिश की थी, लेकिन ग्रामीणों की एकजुटता के कारण यह संभव नहीं हो सका। अब जब आश्रम बना तो ग्रामीणों ने 50 से बढ़ाकर 100 सीटर करने की मांग है। इस बार जैसे ही स्कूलें खुलेंगी, नक्सलगढ़ गुमियापाल व इसके आसपास के गांवों के बच्चे इसी आश्रम में रहेंगे और पढ़ेंगे। अब तक इस गांव का 50 सीटर आश्रम असुविधाओं के बीच गांव के ही मिडिल स्कूल में संचालित हो रहा था। कलेक्टर दीपक सोनी ने कहा कि आश्रम भवन बनकर तैयार है। ग्रामीणों की एकता के कारण ही यह संभव हुआ। इस बार बच्चों को यहीं शिफ्ट करेंगे। इसके बाद सीटें भी बढ़ाएंगे। एसपी डॉ. अभिषेक पल्लव ने इसे पुलिस व प्रशासन के प्रति ग्रामीणों के भरोसे की जीत व नक्सलगढ़ में बदलाव बताया है। उन्होंने कहा कि यहां जल्द ही कैंप भी खुलेगा और बहुत से विकास काम होंगे। दरअसल गुमियापाल वही गांव है, जिसके आसपास के इलाके में साल 2019 में बड़े नक्सली मारे गए हैं। ग्रामीणों पर दबाव बनाने नक्सली उनका अपहरण
भी कर चुके हैं।

नक्सलियों की रोक पर शीट लगाकर मकान बनाए
साल 2003-04 के बाद से अपनी पैठ वाली जगहों में नक्सली अपनी बिना मर्जी के किसी भी तरह का सरकारी काम नहीं होने देते रहे हैं। अंदरूनी गांवों में सरकारी स्कूल, आश्रम भवन तभी बनने देते जब वे स्लैब की बजाए शीट ही हों। साल 2017-18 को दंतेवाड़ा के नक्सलगढ़ कई गांवों में पक्की छत वाले प्रधानमंत्री आवास तक बनाने रोक लगा दी थी। नक्सलियों की इजाजत से ही कई जगह ग्रामीणों ने पक्की छत की बजाए शीट लगाकर मकान बनाने पड़े।

इधर नक्सलियों ने जारी किया पर्चा, ठेकेदार को धमकी
इधर अब इस आश्रम के बन जाने के बाद नक्सली खफा हैं। रविवार को ठेकेदार के नाम एक पर्चा जारी किया है, जिसमें लिखा है कि ठेकेदार ने भवन बनाने से पहले गांव के लोग व नक्सलियों से मुलाकात नहीं की। जान से मारने की धमकी भी पर्चे के जरिए दी गई है।



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If the villagers unite, the ashram in Naxalgarh will be studied from this year


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