दो लाख के इनामी नक्सली प्रकाश करतामी उर्फ पांडू ने अपनी पत्नी सीएनएम सदस्य हड़मे करतामी के साथ सरेंडर कर दिया है। इस बार नक्सल सरेंडर की कहानी थोड़ी अलग है। इस दंपती ने 4 साल पहले संगठन में बड़े कामों को छोड़ गांव लेवल का ही काम संभाला था। लेकिन जब बड़े गुडरा गांव में लोन वर्राटू अभियान के तहत इनके नामों की सूची चस्पा हुई तो पुलिस के सामने आकर सरेंडर कर दिया।
संरेंडर के बाद प्रकाश ने एसपी से ट्रैक्टर भी मांगा। एसपी डॉ अभिषेक पल्लव ने बताया कि ये दोनों अपने ही साथी नक्सली बदरू, भगत की हत्या में शामिल थे। बदरू झीरम हमले में शामिल नक्सली है, इसका नाम भी रिकॉर्ड में है। इसकी हत्या की खबर सरेंडर नक्सलियों से ही पता चलती है। बॉडी रिकवर नहीं हुई थी। एसपी ने कहा लोन वर्राटू अभियान के तहत नक्सलियों का सरेंडर हो रहा है।
सरेंडर कराने में पुलिस के साथ सीआरपीएफ 195 बटालियन की भी बड़ी भूमिका है। इस दौरान सीआरपीएफ डीआईजी डीएन लाल, एसपी डॉ अभिषेक पल्लव, एएसपी राजेन्द्र जायसवाल, एसडीओपी देवांश सिंह राठौर भी मौजूद थे।
दो साल तक नक्सलियों की निगरानी में थे
सरेंडर के बाद इन लोगों ने बताया कि बदरू और भगत की हत्या के बाद नक्सलियों ने इन दोनों को ही निगरानी में रखा था। जिस नक्सली गंगा की निगरानी में ये दोनों दो साल तक रहे उसने भी सरेंडर कर दिया था। संगठन में रहते हड़मे व प्रकाश के बीच प्रेम हुआ। नक्सलियों ने इसी शर्त पर गांव आने दिया कि ये पुलिस के लिए काम नहीं करेंगे। 2017 में दोनों ने शादी की। लेकिन पुलिस से छिपते-छिपाते रहे। प्रकाश प्लाटून सदस्य है, जो एसएलआर रखता था।
पहली बार सरेंडर के बाद नक्सली प्रकाश ने मांगा ट्रैक्टर, कलेक्टर ने कहा- जल्द देंगे
प्रकाश करतामी ने सरेंडर करते ही कहा कि पुलिस में भर्ती होने से खतरा है। नक्सली परेशान करेंगे। साहब ट्रैक्टर दिलवा दीजिये, बड़े गुडरा गांव में 10 एकड़ खेती है, गांव में रहकर ही खेती करूंगा। परिवार के साथ सुखी जीवन जीना चाहता हूं। अब पहली बार ऐसा होगा जब सरेंडर नक्सली को ट्रैक्टर मिलेगा। एसपी डॉ अभिषेक पल्लव ने कहा कि ट्रैक्टर दिलवाएंगे। ये बात कलेक्टर दीपक सोनी को पता चली। उन्होंने सरेंडर नक्सली प्रकाश को ट्रैक्टर देने की घोषणा कर दी। कलेक्टर ने कहा कि ये शासन प्रशासन के प्रति भरोसा रख जिस तरह से नक्सली सरेंडर कर रहे हैं और सरेंडर करते ही रोजगार से जुड़ने की मांग कर रहे हैं।
अफसरों ने रखा विकल्प: लोन वर्राटू अभियान शुरू करने के बाद सरेंडर हो रहे नक्सलियों के लिए पुलिस ने विकल्प रखा है। यदि वे पुलिस में भर्ती नहीं होना चाहते हैं तो गांव में ही मनचाहा रोजगार देने की शुरुआत की गई है। अब तक सरेंडर नक्सली डीआरजी में शामिल होते रहे हैं।
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