इस वर्ष हरियाली अमावस्या का अद्भुत संयोग सोमवती अमावस्या, हर्षण योग, श्रावण सोमवार, पुनर्वसु नक्षत्र के साथ हो रहा है। ज्योतिषाचार्य डॉ. अनिल तिवारी हरियाली अमावस्या के दिन पांच ग्रह चन्द्र, बुध, गुरु, शुक्र, शनि अपनी राशि में रहकर प्रकृति एवं मानव दोनों को अपना आशीर्वाद देंगे। रविवार की रात 12.11 बजे से अमावस्या तिथि प्रारम्भ होगी जो कि 20 जुलाई की रात्रि 11.02 बजे पुष्य नक्षत्र(सोम पुष्य) के साथ समाप्त होगी । यह पर्व समृद्धि और पर्यावरण सरंक्षण के लिए महत्व रखता है। इस दिन शंकर, पार्वती की पूजा एवं पीपल वृक्ष की पूजा परिक्रमा करने का विधान है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मालपुआ का भोग लगाकर पंचामृत से शिव जी का अभिषेक करने से कालसर्प दोष एवं शनि दशा से प्रभावित जातकों को लाभ होता है । हरियाली सोमवती अमावस्या के दिन पितरों का ध्यान एवं तर्पण अवश्य करना चाहिए एवं साथ ही फलदार/छायादार वृक्ष पंच पल्लव आंवला,बेल,तुलसी,आम,शमी का पेड़ अवश्य लगाना चाहिए इससे सुख, समृद्धि,सौभाग्यकारक माना गया है।
आज की मध्यरात्रि साधना के लिए विशेष
20 जुलाई सोमवार को हरियाली अमावस्या का पर्व मनाया जाएगा। इस वर्ष सोमवती अमावस्या पर पुनर्वसु नक्षत्र के बाद रात्रि में 9.22 बजे से पुष्य नक्षत्र रहेगा। सोमवार को यदि पुष्य नक्षत्र रहे तो उसे सोम पुष्य कहते हैं। रात्रि में सर्वार्थ सिद्धि योग भी है। सोमवार के दिन पुष्य नक्षत्र का आना सोम पुष्य कहलाता है। अमावस्या की रात सोमपुष्य के साथ सर्वार्थसिद्धि योग मध्य रात्रि साधना के लिए विशेष होता है।
आज करें ये विधान
ज्योतिषाचार्य के अनुसार हरियाली अमावस्या के दिन सूर्य देव को अर्ध्य,पितर पूजा,पीपल पूजा/परिक्रमा, हनुमान चालीसा का पाठ,स्थिर लक्ष्मी के लिए ईशान कोण में घी का दीपक अवश्य रखना चाहिए।
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