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ये हैं ऐसे लोग जो त्योहार पर नहीं जाएंगे घर, कहा- फर्ज निभाना जरूरी

कोरोनाकाल की विपरीत परिस्थिति में हम सुरक्षित रहें, इसके लिए बहुत से लोग अपनी जान-जोखिम में डालकर कोरोना से हमारी रक्षा कर रहे हैं। सैकड़ों डॉक्टर, नर्स, लैब टेक्निशियन, स्वच्छता व क्वारेंटाइन सेंटर्स की जिम्मेदारी संभाल रहे स्टाफ, पुलिसकर्मी हफ्तों घर नहीं जा पा रहे। बच्चों, परिवार से दूर हैं। भास्कर ऐसे कोरोना वॉरियर्स के त्याग का सम्मान करता है। इसी सोच के तहत रक्षाबंधन पर ‘सलामती की डोर’ अभियान हमारी एक छोटी-सी कोशिश है कि हर कोरोना वॉरियर तक राखी के रूप में हम अपनेपन का स्नेह पहुंचा सकें। इस अभियान के तहत भास्कर की टीम अस्पताल, नगर के विभिन्न वॉर्ड, क्वारेंटाइन सेंटर्स समेत विभिन्न जगहों पर तैनात कोरोना वॉरियर्स तक राखी पहुंचाएगी। यह रेशम की डोर सिर्फ उनके त्याग का सम्मान नहीं बल्कि लोगों की ओर से उनकी सलामती की कामना का प्रतीक भी होगी। इस नेक काम में भास्कर के साथ महिला समूह, सामाजिक संगठन भी हमराही बने हैं।

112 दिन से घर नहीं गया, बहन से कहूंगा- सभी की सलामती की दुआ मांगना
"पिछले 112 दिन से घर नहीं गया हूं जब से कोरोना संक्रमण फैला है तब से माइक्रोबायोलॉजी डिपार्टमेंट में कोरोना की जांच में लगा हुआ हूं। कुछ दिन पहले हमारा एक साथी कोराना पॉजिटिव निकला जिसके चलते हमें क्वारेंटाइन कर दिया गया है। हमें 14 दिन तक क्वारेंटाइन सेंटर में रहना पड़ेगा। मेरी जिंदगी का यह पहला साल होगा जब मैं अपनी बहनों से राखी बंधवाने नहीं जा पाउंगा। रक्षाबंधन पर बहन से नहीं मिल पाने का दुख तो है लेकिन खुशी इस बात की है कि लोगों की जिंदगी बचाने की मुहिम में मुझे क्वारेंटाइन होना पड़ा। मेरी तीन बहनें हैं, मैं सबसे बड़ा हूं। मैं अपनी बहनों से कहना चाहता हूं कि मेरे बदले छोटे भाई को राखी बांध देना, दुखी मत होना। रक्षासूत्र बांधने के दौरान जब हमारी सलामती की दुआ मांगोगी तो साथ में पूरे देश के भाई-बहनों की सलामती की दुआ मांगना।"
- सचिन रावटे, लैब टैक्नोलॉजिस्ट, मेडिकल कॉलेज

8 कोरोना वॉरियर्स एक साथ क्वारेंटाइन में रक्षाबंधन पर घर नहीं जा पाएंगे
मेकॉज के माइक्रोबायोलॉजी डिपार्टमेंट में कोरोना जांच करने से लेकर सैंपल कलेक्ट करने वाले 8 कर्मचारी अभी तोकापाल क्वारेंटाइन सेंटर में हैं। ये सभी इस बार रक्षाबंधन पर घर नहीं जा पाएंगे। यहां अभी दंतेवाड़ा के प्रतीक गोविंद ध्रुव, रामसिंग सोरी, नारायणपुर के जयराम कोवाची, धमतरी के पोखन साहू, बीजापुर के मुकेश पटेल, कांकेर के दुर्गेश मंडावी, कोंडागांव के संदीप कुमार और सचिन क्वारेंटाइन हैं। सभी भाइयों ने अपनी बहनों के लिए स्नेह का मैसेज दिया है।

रक्षाबंधन पर हॉस्पिटल में दूसरे भाइयों की रक्षा करना भी फर्ज है
"मेरे दो भाई हैं हर साल भैरमगढ़ से राखी बंधवाने जगदलपुर आते हैं। यह पहला मौका है जब मैं उन्हें राखी नहीं बांध पाउंगी। मन थोड़ा दुखी है लेकिन देश के दूसरे भाइयों की रक्षा की जिम्मेदारी भी हमारे ही कंधों पर है। एक नर्स होने के नाते मेरा पहला फर्ज मरीज की सेवा करना है और मैं इसे पूरी निष्ठा से कर रही हूं। मेरे साथ यहां हॉस्पिटल में 16 और स्टाफ नर्स हैं, वह भी अपने भाइयों से नहीं मिल पाएंगी लेकिन सभी इस बात से खुश हैं कि वे फर्ज पूरा कर रही हैं। मेरे साथ नारायणपुर की एक स्टाफ वसुंधरा भी है उसका कोई सगा भाई नहीं है लेकिन ऐसे कुछ लोग हैं। जिन्हें वह सगे भाई से ज्यादा मानती है। वह भी थोड़ी दुखी है लेकिन फिर फर्ज को याद कर सारे दुख भूल जाती हैं। भले ही इस रक्षाबंधन में मैं भाइयों साथ नहीं हूं लेकिन मेरी दुआएं और आशीष उनके साथ हैं।"
- चंद्रकिरण, स्टाफ नर्स, कोविड हॉस्पिटल, मेकॉज

बस्तर में इतने कोरोना वॉरियर्स काम कर रहे

  • स्वास्थ्य विभाग - 250
  • एसडीआरएफ - 30
  • पुलिसकर्मी - 220
  • शिक्षा विभाग - 200
  • सफाईकर्मी-रसोइया - 50


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These are the people who will not go home on the festival, said - it is necessary to fulfill the duty


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