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मौसम विभाग ने दो साल पहले ही बैन कर दिए थे चीनी उपकरण

ऋषि भटनागर |लद्दाख के गलवान में भारत-चीन के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद जहां देशभर में चीन के खिलाफ माहौल बना हुआ है, वहीं चीनी उपकरणों और मोबाइल एप्लीकेशन का बड़े स्तर पर विरोध भी हो रहा है।, जबकि मौसम विभाग ने जगदलपुर के दफ्तर में चले चीनी उपकरणों को दो साल पहले ही हटा दिया था। इन चीनी उपकरणों की जगह कोरियन कंपनी के उपकरण लगा दिए गए थे। दो सालों से यहां चीनी नहीं, बल्कि कोरियन कंपनी के उपकरणों से मौसम का हाल वैज्ञानिक जान रहे हैं, जबकि चीनी उपकरण का उपयोग नहीं हो रहा है।
रेडियो साउंडिंग सिस्टम अब कोरियन कंपनी का
हवा के दाब और वायुमंडल की वास्तविक स्थिति का पता लगाने विभाग में दो साल पहले ही चीनी उपकरणों को खारिज कर दिया। इसके बाद अधिकांश उन उपकरणों का उपयोग यहां किया जा रहा है, जो भारत में बने हुए हैं। भारत के पुणे, नागपुर सहित अन्य जगहों पर बने उपकरणों से मौसम विभाग लैस है।

गुब्बारे ही चीनी, ये भी एक महीने में खत्म हो जाएंगे
मौसम विभाग में वर्तमान में सिर्फ हवा में छोड़े जाने वाले गुब्बारे और इसमें लगने वाले उपकरण ही चीनी हैं। इसके अलावा सारा कुछ बदला जा चुका है। बताया जाता है कि विभाग के जगदलपुर दफ्तर में ये गुब्बारे और उपकरणों की संख्या भी करीब 20 से 25 बताई जा रही है, यानि एक महीने में खत्म हो जाएंगे।
चार साल पहले लगाए गए थे चीनी उपकरण
क्षेत्रीय कार्यालय के प्रभारी आरके शोरी ने बताया कि तकरीबन चार साल पहले चीनी सिस्टम लगाए गए थे, जो मौसम के छोटे बदलावों को पकड़ पाने में सक्षम नहीं थे। ऐसे में कई बार मौसमी बदलावों की जानकारी नहीं मिल पाती थी, लेकिन दो साल पहले इन्हें हटाकर कोरियन उपकरण लगाने के बाद सब ठीक है।

दफ्तर की छत पर बंद पड़ा चीनी उपकरण, कोरियन कंपनी के एंटीना से लिया जा रहा काम
मौसम विभाग की छत पर चीनी उपकरण जीपीएस रेडियो साऊंडिंग सिस्टम अब भी लगा है, लेकिन इसका उपयोगविभाग कर ही नहीं रहा है। इसी सिस्टम के बगल में लगे कोरियन एंटिने से ही मौसम की जानकारी जुटाई जा रही है। बंद पड़ा सिस्टम चीन के बीजिंग में बना है, जिस पर बीजिंग चैंगफेंग माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी लिमिटेड अंकित है।



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Meteorological Department had banned Chinese equipment two years ago.


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