हरेली त्योहार के मौके पर सोमवार 20 जुलाई से राज्य सरकार की गोधन न्याय योजना शुरू होगी। जिले के दो सौ गाैठान में इसी दिन से गोबर कलेक्शन का काम भी शुरू हो जाएगा। एक गोठान में प्रारंभिक चरण में कम से कम पांच स्व सहायता समूह की महिलाओं को अपशिष्ट प्रबंधन, बाड़ी, वर्मी कंपोस्ट खाद बनाना, गोबर खरीदी सहित पांच प्रकार के काम दिए जा सकते हैं। औसतन दस महिलाओं का एक समूह होगा तो पचास महिलाओं को काम मिल सकता है। इस हिसाब से 200 गाैठान में 10 हजार से अधिक महिलाओं को रोजगार मिलेगा। इनके अलावा चरवाहा लोगों को भी स्वरोजगार मिल सकेगा।
गोधन योजना के प्रारंभ होने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी और योजना के क्रियान्वयन से जैविक खेती को बढ़ावा, ग्रामीण एवं शहरी स्तर पर रोजगार के नये अवसर, गौ पालन एवं गौ सुरक्षा को प्रोत्साहन के साथ-साथ पशुपालकों को आर्थिक लाभ मिलेगा। सीईओ जिला पंचायत तीर्थराज अग्रवाल ने बताया कि नरवा, गरूवा, घुरूवा व बाड़ी का जिले में संरक्षण एवं संवर्धन किया जा रहा है।
गौठाान में गोबर से कैसे बनाई जाएगी खादयह सीखा नगरीय निकाय के सीएमओ ने
गौधन न्याय योजना के नगरीय निकाय क्षेत्रों में प्रभावी और व्यवस्थित क्रियान्वयन के लिए जिले के नगरीय निकायों के सीएमओ को प्रशिक्षण दिया गया। उन्हें बताया गया कि गोबर से खाद कैसे बनेगी। उप संचालक कृषि एम आर तिग्गा और शहरी विकास परियोजना के प्रभारी एवं डिप्टी कलेक्टर केएस पैकरा ने गौधन योजना के संबंध राज्य सरकार के दिशा निर्देश की विस्तृत जानकारी दी। कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक शशिकांत सूर्यवंशी ने वर्मी कल्चर, वर्मी कंपोस्टिंग और वर्मी कंजर्वेशन के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि केंचुओं के संवर्धन को वर्मी कल्चर कहा जाता है। केचुओं एवं सूक्ष्म जीवों की सहायता से गोबर को उपजाऊ खाद में बदला जाता है, जिसे वर्मी कंपोस्ट कहते हैं। केचुओं को वर्मी कंपोस्ट से अलग करने की प्रक्रिया को वर्मी कंजर्वेशन कहा जाता है। प्रशिक्षण में वर्मी कंपोस्ट तैयार करने और उसमें उपलब्ध पोषक तत्व से मृदा को होने वाले लाभ के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई।
वर्मी कम्पोस्ट टैंक में बनेगी खाद
गोठान में बनाए गए वर्मी कम्पोस्ट में गोबर से खाद बनाने का काम किया जाएगा। जिले में 2 हजार 319 वर्मी कम्पोस्ट शेड की स्वीकृति दी गई है। इन वर्मी कम्पोस्ट टैंक में महात्मा गांधी नरेगा से 438, कृषि विभाग से 410, वर्मी बेड कृषि विभाग से 270 एवं मनरेगा एवं एसबीएम से वर्मी कम्पोस्ट टैंक 1181 को स्वीकृत किया गया हैं। इन टैंक के समुचित उपयोग के लिए गोठान संचालन समिति, एनआरएलएम के स्व सहायता समूह अथवा अन्य चयनित संस्थाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने के लिए आवंटित किया जाएगा।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था में आएगा बदलाव
जिप सीईओ श्री अग्रवाल ने बताया कि गोधन न्याय योजना से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बदलाव आएगा। इससे पशुपालकों की आय में वृद्धि होगी, पशुधन विचरण एवं खुली चराई पर रोक लगेगी, जैविक खाद के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा, खरीफ एवं रबी फसल सुरक्षित रहेगी। स्थानीय स्तर पर स्व सहायता समूहों को रोजगार का अवसर प्राप्त होगा।
2 रुपए किलो में खरीदेंगे गोबर
जिले में गोठान में गोवंशीय एवं भैंसवंशीय पशुपालक से गोबर का क्रय शासन द्वारा निर्धारित दर से किया जाएगा। वर्तमान में शासन द्वारा 2 रुपए किलोग्राम परिवहन व्यय सहित की दर निर्धारित की गई है। गोबर विक्रय करने के पहले गोपालक गोबर की गुणवत्ता, गोबर में कांच, मिट्टी, प्लास्टिक आदि नहीं है इसको देखेंगे।
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