छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी गोधन न्याय योजना की शुरुआत ग्रामीण इलाकों के साथ-साथ राजधानी समेत सभी शहरों में हरेली के दिन से होगी। स्वच्छ भारत मिशन और डीएमएफ (जिला खनिज फंड) से जोड़कर गोबर की खरीदी की जाएगी और फिर वर्मी कंपोस्ट खाद बनाई जाएगी।
सरकारी तौर पर खरीदे जाने वाले गोबर की प्रोसेसिंग गोकुलधाम में की जाएगी। इसके लिए गोबर डेढ़ रुपए किलो में खरीदकर वर्मी खाद बनेगी, जिसे सरकारी तौर पर ही 8 रुपए किलो की दर से खरीदा जाएगा। इस योजना को 14 जुलाई को होने वाली मंत्रिमंडल की बैठक में मंजूरी दे दी जाएगी। गांवों में यह योजना गौठान समितियों पर निर्भर होगी।
शहरी इलाकों में अभी इसका मैकेनिज्म तैयार किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार बताया गया है कि प्रदेश के लगभग सभी नगरीय निकायों में गोकुलधाम के लिए स्थान आरक्षित किए गए हैं। साथ-साथ शहरी इलाकों में गाैठानों का निर्माण भी किया गया है। प्रदेश में अब तक 22 सौ गौठान तैयार हो गए हैं। अगले 15 दिनों में 3000 और बना लिए जाएंगे। इन गौठानों और गोकुलधामों का उपयोग गोबर की प्रोसेसिंग के लिए किया जाएगा।
हर गांव में हजार तक पशुधन
प्रदेश के 19 हजार गांवों में से हर गांव में 300 से 1000 गाय और भैंसे हैं। इन्हीं का गोबर लोगों से डेढ़ रुपए किलो में खरीदकर इकट्ठा किया जाएगा। हर व्यक्ति से न्यूनतम 5 किलो गोबर लिया जाएगा। स्व सहायता समूह 45 दिन में गोबर को वर्मी कंपोस्ट में बदल देंगे। साल भर में 45-45 दिनों के 5 चक्र चलेंगे। यह खाद किसान खरीद सकते हैं। सरकारी तौर पर भी इसे सहकारी समितियों, नगरीय निकायों और वन विभाग को 8 रुपए किलो में बेचा जाएगा।
गमले, दीए आदि भी बनेंगे
शहरी इलाकों में गोबर से वर्मी कम्पोस्ट के साथ गोबर की लकड़ी, दिए, गमले, अगरबत्ती, सजावटी सामान के साथ कंडे बनाए जाएंगे। स्मार्ट सिटी मिशन के अंतर्गत इस तरह की चीजें बनाई जा रही है।
"योजना से अर्थव्यवस्था सुधरेगी, लोगों को रोजगार मिलेगा तथा लोग गो-पालन की ओर लौटेंगे। शहरी इलाकों के लिए भी अलग से योजना है। हरेली के दिन से गांव और शहर, दोनों ही इलाकों में गोबर खरीदी एक साथ शुरू की जा रही है।"
-प्रदीप शर्मा, मुख्यमंत्री के सलाहकार
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