महाराष्ट्र-बिहार समेत चार राज्यों के 8 बच्चे 129 दिन से लाॅक, 6 अगस्त को लॉकडाउन खुलने पर भेजे जाएंगे
अमिताभ अरुण दुबे | राजधानी में पहला लाॅकडाउन 19 मार्च को लगा और उसके बाद लाॅकडाउन तथा ई-पास की जरूरत की वजह से ओडिशा, महाराष्ट्र, बिहार और झारखंड के 8 बच्चे तब से ऐसे फंसे कि 129 दिन बाद भी राजधानी से निकल नहीं सके हैं। सभी बच्चे बाल आश्रम में रह रहे हैं। उन्हें भेजने की दो-तीन बार कोशिश हुई, लेकिन कोई न कोई रुकावट आ गई। अब इन्हें राजधानी में लाॅकडाउन खुलने यानी 6 अगस्त के बाद ही भेजने की तैयारी है।
ये सभी बच्चे मार्च और मार्च के बीच तालाबंदी से जुड़ी विभिन्न परिस्थितियों के साथ प्रवासियों के विस्थापन जैसे हालात में शहर में पाए गए थे। लगातार ट्रेसिंग के बाद बच्चों के अभिभावकों के पते और जानकारी मिल सकी। लॉकडाउन में बच्चों के मां-बाप भी रायपुर तक नहीं आ सके। इसी कारण महिला बाल विकास की टीमें भी उन्हें छोड़ने नहीं जा सकीं। इसलिए बच्चे यहीं रह गए। महिला एवं बाल विकास अधिकारी अशोक पांडेय के मुताबिक सभी बच्चों को संस्थागत बालगृहों में रखा गया है। भास्कर को मिली जानकारी के मुताबिक रायपुर शहर में 99 बच्चों को भी रेस्क्यू किया गया।
लाॅकडाउन में यह स्थिति
- 99 बच्चे विभिन्न मामलों में मुक्त
- 15 अन्य जिलों के शहर में रेस्क्यू
- 08 बच्चे शहर में अन्य राज्यों के
- 102 बच्चों का किया गया पुनर्वास
- 08 बच्चे रह गए परिवहन बंद होने से
बालगृह में कमी महसूस नहीं की
15 साल के ओडिशा के रिषभ (बदला हुआ नाम) और 12 साल की रिंकी (बदला हुआ नाम) को अपने घर परिवार की बहुत याद आती है। बच्चों ने कहा- लेकिन बालगृह में हमें कभी किसी कमी का एहसास नहीं हुआ। लेकिन अब जल्दी घर जाना चाहते हैं। मार्च में महाराष्ट्र का दस साल का बालक कमल (बदला हुआ नाम) भी शहर में ही फंस गया। बालगृह के लोग घर वालों से बात करवा देते हैं। उसने भी कहा कि राखी में घर चला जाता तो अच्छा होदा।
"शहर में अन्य राज्यों के लंबे समय से फंसे बच्चों को 6 अगस्त के उनके घरों में भेजने की व्यवस्था की जा रही है।"
- अशोक पांडेय, जिला प्रोग्राम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास
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