केंद्र सरकार ने वर्ष 2025 तक टीबी उन्मूलन का लक्ष्य रखा है। इसी लक्ष्य को लेकर बस्तर जिले में स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगातार कोशिश की जा रही है। विभाग द्वारा पूरक पोषण आहार बांटा गया। वहीं अब हर मरीज के खाते में 500 रुपए जमा कर रहे हैं। बावजूद इसके टीबी के मरीजों की संख्या
कम नहीं हो रही है। महज 6 महीने में ही 10 लोगों ने टीबी रोग से अपनी जान गवाई।
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक जहां पिछले साल टीबी से 37 लोगों की मौत हुई, वहीं 1377 नए मरीज मिले थे। जबकि इस साल जनवरी से लेकर जून में 450 नए मरीज मिले और 10 लोगों की मौत हुई है। मरने वालों में अधिकतर मरीजों की उम्र 45 से 60 साल के बीच में है। इनमें फेफड़े की टीबी वाले मरीजों की संख्या अधिक है। जिला क्षय नियंत्रण अधिकारी डॉ. सीआर मैत्री ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा क्षय रोग उन्मूलन के लिए मैदानी अमले द्वारा अंदरूनी इलाकों में शिविर का आयोजन किया जा रहा है। साथ ही उपकेंद्र व सीएचसी में भी दवाओं का स्टाक रखा गया है। जांच अब बराबर की जा रही है।
उन्होंने बताया 2025 तक टीबी उन्मूलन के लिए मिले लक्ष्य को पूरा करने की कोशिश की जा रही है। टीबी के मरीज इस समय सबसे अधिक जगदलपुरब्लाॅक के नगरीय क्षेत्र में बढ़ रहे हैं। 6 महीने में शहर में करीब 180 नए मरीज इस बीमारी के मिले हैं।
कोरोना के चलते 39 पीएचसी में जांच बंद
स्वास्थ्य विभाग द्वारा क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम के तहत हर साल सर्वे किया जाता है। इसमें चह्नांकित मरीजों को सूचीबद्ध कर उनका इलाज शुरू किया जाता है। इस साल भी टीबी के मरीजों में इजाफा देखा जा रहा है। आलम यह है कि मरीजों की संख्या बढ़ने के बाद इस बीमारी की जांच नहीं हो पा रही है। अचानक जांच कम होने के संबंध में जब स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से बात की गई तो उन्होंने बताया कि कोरोना का असर टीबी की जांच पर पड़ रहा है। कई लैब टैक्निशयन इस समय कोरोना की जांच में जुटे हुए हैं। जानकारी के मुताबिक जिले के 39 पीएचसी में टीबी की जांच बड़े पैमाने पर प्रभावित हुई है। आलम है कि इस बीमारी की जांच को लेकर मरीजों को सीएचसी, महारानी हाॅस्पिटल और मेकाॅज की दौड़ लगानी पड़ रही है।

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