कोरोना वायरस का असर 22 अगस्त से शुरू हो रहे गणेशोत्सव के अलावा मूर्तिकारों पर भी पड़ रहा है। गणेश चतुर्थी को शहर में रखी जाने वाली मूर्तियों के लिए जहां अप्रैल से ही ऑर्डर मिलने शुरू हो जाते थे। इस साल अब तक एक भी ऑर्डर नहीं आया है। जिन समितियों के हर साल पहले से ही बड़े मूर्तियों बनाने के ऑर्डर रहते थे उन्होंने भी इस साल मना कर दिया है। मूर्तिकार भूपेंद्र कुंभकार ने बताया कि जिले में करीब 55 लाख रुपए का गणेश मूर्तियों का कारोबार इस बार प्रभावित होने की आशंका हैं। समिति सदस्यों का कहना बप्पा की छोटी मूर्ति स्थापित करेंगे।
हर साल चार माह पहले से मिलता था मूर्ति का ऑर्डर
मूर्तिकारों ने बताया कि गणेशोत्सव से चार माह पहले ही हमारे पास अॉर्डर आ जाते थे। लेकिन इस बार बड़ी मूर्तियों को लेकर एक भी अॉर्डर नहीं आया है। कोरोना ने रोजगार छीन लिया है। छोटी मूर्तियां बना रहे है, उससे ज्यादा आय नहीं होगी। आमतौर पर गणेश पूजा के लिए पंडालों में रखने के लिए मूर्तियां अभी से ही बननी शुरू हो जाती थीं। लेकिन इस बार तस्वीर दूसरी है। कोरोना की वजह से इस बार उत्साह नहीं दिख रहा है।
इस बार स्थिति विपरीत लोगों में भी उत्साह कम
मूर्तिकार भूपेन्द्र कुंभकार ने बताया कि हमारे जिले में 8 शहरी क्षेत्र और 700 से ज्यादा गांव है। शहरी क्षेत्र में प्रत्येक वार्डों में गणपति बप्पा की मूर्ति हर साल सार्वजनिक स्थानों में विराजित होते आ रहे थे लेकिन इस बार स्थिति विपरीत है। उत्साह कम है। 55 लाख रुपए से ज्यादा का कारोबार प्रभावित हुआ है। यह न्यूनतम आंकड़ा है। बालोद शहरी व ग्रामीण क्षेत्र में ही पिछले साल 10 लाख रुपए से ज्यादा की मूर्तियों की ब्रिक्री हुई थी।
पिछले साल 70 बड़ी मूर्तियां स्थापित हुई थीं
यहां वीरानी का आलम: बालोद, बरही, लाटाबोड़, अरौद, सांकरी, नेवारीकला, खपरी मालीघोरी, डौंडीलोहारा, डौंडी, गुंडरदेही, गुरूर ब्लॉक मुख्यालय व ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना प्रभाव के चलते वीरानी का आलम है। इसके अलावा लोग कृषि कार्यों में भी व्यस्त हैं।
हर साल यहां से आते थे मूर्तिकार इस बार नहीं: पहले बालोद में कोलकाता, दर्री, मगरलोड धमतरी मूर्तिकार पहुंचकर 200 से 250 मूर्ति बनाते थे। इस बार एक भी मूर्तिकार नहीं पहुंचा है। छोटी मूर्ति की कीमत इस बार 200 रुपए से दो हजार रुपए तक है।
बालोद में पिछले साल ऐसी स्थिति थी: बालोद के 20 वार्डों सहित आसपास गांवों के सार्वजनिक स्थानों में न्यूनतम 70 बड़े मूर्ति स्थापित हुए थे। जिले में 400 से ज्यादा मूर्तिकार हैं। जिसमें गणेश की मूर्ति बनाने वाले 200 से ज्यादा हैं। समितियां उत्साह के साथ गणपति की प्रतिमा स्थापित करती थीं। वहीं पंडाल में विविध आयोजन भी किए जाते थे।
सार्वजनिक स्थानों पर मूर्तियां नहीं रखेंगे
नगर पालिका सीएमओ विकास पाटले का कहना है कि इस बार गणेशोत्सव को लेकर आदेश तो जारी नहीं हुआ है लेकिन जिस गति से कोरोना के मरीज देशभर में बढ़ते जा रहे है, उस हिसाब से शासन की ओर से सोशल डिस्टेंस का पालन कराने के लिए सार्वजनिक स्थानों में धार्मिक सामूहिक आयोजन पर लगा प्रतिबंध आगे भी जारी रह सकता है। इस स्थिति में गणपति बप्पा की मूर्ति विराजित नहीं होंगे।
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