घर में जुड़वां बच्चियों का जन्म, हालत ठीक नहीं होने पर प्रसूता को स्वास्थ्यकर्मियों ने 500 मीटर कुर्सी में ढोकर एंबुलेंस तक पहुंचाया
बलरामपुर जिले के वाड्रफनगर ब्लॉक की ग्राम पंचायत सुलसुली के आश्रित गांव चांदी में एम्बुलेंस के समय पर नहीं पहुंचने के कारण मितानिन और स्वस्थ्य कर्मियों ने गर्भवती को प्रसव पीड़ा होने पर घर में ही सुरक्षित प्रसव कराया।महिला ने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया है। इसके बाद घर तक पहुंचने का रास्ता नहीं होने के कारण आधा किलोमीटर तक कुर्सी में ढोकर एम्बुलेंस तक पहुंचाया। ग्राम पंचायत सुलसुली के आश्रित ग्राम चांदी निवासी राजपाल पंडो की पत्नी राजमती पंडो 8 माह की गर्भवती थी। उसके गर्भ में जुड़वा बच्चे पल रहे थे।
रविवार को खेत में काम करने के दौरान अचानक उसे प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। वहां मौजूद लोगों के सहयोग से परिजन ने राजमती को घर तक पहुंचाया। इसके बाद एम्बुलेंस के लिए 102 नंबर पर फोन किया, लेकिन जब तक 102 वाहन पहुंचता तब तक के राजमती ने एक बच्चे को जन्म दे दिया। वहीं दूसरा बच्चा गर्भ में फंस गया। इस पर मितानिन ने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में सूचना दी। वहीं स्वास्थ्य कर्मियों की मदद से दूसरे बच्चे की भी सफल डिलीवरी कराई गई। इसके बाद वजन कम होने के कारण बच्चों और महिला को कुर्सी पर वाड्रफनगर स्वास्थ्य केंद्र लाया गया। जहां दोनों नवजात बच्चियां स्वस्थ्य हैं। सरगुजा संभाग के कई जिलों के दर्जनों गांव बरसात के मौसम में पहुंचविहीन हो जाते हैं। ऐसे में जब मरीज या गर्भवती अस्पताल नहीं पहुंच पाती है, तो कई बार मौत तक की घटना हो जाती है। इसके बाद भी सरकार में बैठे लोग और अफसर पहुंचविहीन के अभिशाप को अब तक दूर नहीं कर सके हैं।
एक वर्ष पहले टूटा पुल अब तक नहीं बना
सुलसुली का यह आश्रित गांव पहुंचविहीन है। चांदी गांव तक जाने वाली सड़क पर बना पुल भी पिछले साल बारिश में टूट चुका है। जिसे बनाने अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की लापरवाही से अब तक कोई पहल नहीं हुई है। यही वजह है कि राजमती को कुर्सी पर बैठाकर 102 वाहन तक लाया गया।
कुपोषण के कारण 8 माह में ही हो गई डिलीवरी
महिला को 8 महीने में ही प्रसव की वजह कुपोषण बताया गया है। बच्चियां भी प्री मेच्योर थीं। उन्हें मेडिकल कॉलेज अम्बिकापुर रेफर किया गया है। जहां बच्चियों को भर्ती कर इलाज किया जाता, लेकिन परिजन रहने और इलाज के लिए पैसों की कमी बताकर महिला और बच्चियों को लेकर घर चले गए। ऐसे में बच्चियों की जिंदगी खतरे में है।
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