सावन के झूले पर हर दिन 4 घंटे झूल रहे हैं राघवेंद्र सरकार और राधा-कृष्ण, 3 को रक्षाबंधन के साथ खत्म होगा उत्सव
शुक्ल पक्ष की द्वितीया यानी 22 जुलाई से झूला उत्सव शुरू हो गया है। मठ-मंदिरों में तरह-तरह के फूलों से भगवान के लिए आकर्षक हिंडोले सजाए गए हैं। हर शाम शृंगार के बाद भगवान को 4 घंटे के लिए झूला झुलाया जा रहा है। यह उत्सव सावन के अंतिम दिन यानी 3 अगस्त तक मनाया जाएगा। संयोग से इस दिन आखिरी सावन सोमवार भी है और रक्षाबंधन भी। हालांकि, लॉकडाउन के चलते फिलहाल मंदिर में भक्तों के प्रवेश पर पाबंदी है। इस बार सिर्फ पुजारी और उनके सहायक ही भगवान को सावन के झूले पर झूला पा रहे हैं।
दरअसल, हर साल सावन के अंतिम 13 दिनों में भगवान को झूला झूलाने की परंपरा है। इसकी शुरुआत सावन के शुक्ल पक्ष की द्वितीया से हो गई है। कहीं-कहीं हरियाली तीज पर भी इसकी शुरुआत हुई। दूधाधारी मठ में राघवेंद्र सरकार के लिए 15 फीट से ऊंचा झूला सजाया गया है। हर शाम राघवेंद्र सरकार का शृंगार कर उन्हें गर्भगृह के बाहर बने झूले पर विराजित किया जाता है। इसी तरह जैतूसाव मठ में भी रोज शाम 4 से 8 बजे के बीच राधा-कृष्ण को झूला झुलाया जा रहा है। संध्या आरती और रात्रि भोग के बाद महाआरती भी झूले में ही की जा रही है।
चांदी का यह झूला 200 साल से ज्यादा पुराना है
दूधाधारी मठ में राघवेंद्र सरकार को जिस चांदी के झूले पर झुलाया जाता है वह 200 साल से ज्यादा पुराना है। मठ के महंत डॉ. रामसुंदर दास ने बताया कि झूले पर राम, सीता, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघन समेत शालिग्राम भी विराजित हैं। ये सभी उत्सव मूर्तियां हैं। खास मौकों पर इन्हें बाहर निकाला जाता है। भगवान की मुख्य प्रतिमा हमेशा गर्भगृह में ही रहती है।
धार्मिक मान्यता... अयोध्या और ब्रज की परंपरा का निर्वहन करने हर साल सावन में मनाते हैं झूला उत्सव
दरअसल, हर सावन अलग-अलग मंदिरों में भगवान को झूला झूलाने की परंपरा है। खासतौर पर कृष्ण और राम मंदिरों में इसे भव्य रूप से मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के मुताबिक भगवान रामचंद्र को उनके भक्त अयोध्या में झूला झुलाया करते थे और राधा-कृष्णा सावन के दिनों में ब्रज में झूला झूलते थे। इसी परंपरा का निर्वहन करते हुए मठ-मंदिरों में हर साल भगवान के लिए झूले सजाए जाते हैं। कहीं कहीं लड्डू गोपाल तो कहीं कहीं शिव-पार्वती को झूला झूलाने की भी परंपरा है।
घरों में मना हरियाली तीज का उत्सव...
हरियाली तीज के मौके पर अग्रवाल समाज के लोगों ने घर में झूला सजाकर राधा-कृष्ण की पूजा की। योगेश अग्रवाल ने बताया कि वृंदावन में भगवान को सोने-चांदी से बने झूले झुलाया जाता है। माना जाता है कि यहां जैसा झूला कहीं नहीं है। 1945 में जिस दिन भारत आजाद हुआ था उस दिन भी हरियाली तीज थी और वृंदावन में तब पहली बार ठाकुर जी झूले पर विराजमान हुए थे।
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