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25 करोड़ रुपए की गड़बड़ी के आरोप के बाद दुग्ध महासंघ के अध्यक्ष रसिक का इस्तीफा

छत्तीसगढ़ दुग्ध महासंघ के अध्यक्ष पद से रजिस्ट्रार द्वारा हटाने के एक माह बाद रसिक परमार ने इस्तीफा दे दिया है। परमार पर 25 करोड़ की अनियमितता का आरोप है। इसे लेकर एफआईआर होने की चर्चा है। परमार के इस्तीफे को एफआईआर से भी जोड़कर देखा जा रहा है। इस मामले में कृषि मंत्री रविंद्र चौबे ने कहा है कि परमार के कार्यकाल में बड़ी अनियमितता हुई है। इसकी जांच कराई जाएगी। और जांच के आधार पर कार्रवाई भी करेंगे। कांग्रेस सरकार बनने के बाद परमार, पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष डॉ. सियाराम साहू और अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष रामजी भारती ऐसे तीन भाजपा नेता हैं, जो अपने पद पर बने हुए हैं। भारती ने हाईकोर्ट से स्टे लिया है, जबकि सियाराम ने भी संवैधानिक पद होने का हवाला देकर पद छोड़ने से इंकार कर दिया है।
परमार के इस्तीफे के बाद अब दुग्ध महासंघ में नए अध्यक्ष की नियुक्ति की जा सकती है। बता दें कि रजिस्ट्रार हिमशिखर गुप्ता ने परमार को हटाने के साथ ही तीन साल के लिए चुनाव लड़ने पर भी रोक लगा दी है। परमार के मुताबिक उनके खिलाफ सुनियोजित कुप्रचार चल रहा था। इस कारण उन्हें अपना दायित्व निभाने में दिक्कत हो रही थी, इसलिए इस्तीफे का फैसला करना पड़ा।

दी सफाई: 19.09 करोड़ का घाटा नहीं, तकनीकी त्रुटि
परमार ने इस्तीफे के बाद यह सफाई दी है कि पंजीयक के पत्र में 2016-17 से 2018-19 के बीच 19.09 करोड़ की हानि का आरोप है। परमार के मुताबिक आंकड़ों में तकनीकी त्रुटियों के कारण इतना घाटा दिख रहा है। उनके कार्यकाल में महासंघ को कभी परिचालन घाटा नहीं हुआ। स्थापना व पूंजीगत व्यय के कारण घाटा दिख रहा था। उनके कार्यकाल में दूध का कलेक्शन 24000 लीटर से बढ़कर 1.30 लाख लीटर हो गया। कुछ कड़े फैसले लिए, जिनसे स्वार्थी तत्वों को नाराजगी हुई। उन लोगों ने मीडिया में लगातार गलत प्रचार किया। आरोप बार-बार जांच में खारिज हुए। घाटे में चलने वाली शासकीय डेयरियों के संचालन का व्यय दुग्ध महासंघ को उठाना पड़ा जो लगभग 3 से 4 करोड़ रुपए है। इसके अतिरिक्त पंजीयक के निर्देश पर महासंघ को छठवां वेतनमान कर्मचारियों को देना पड़ा जिसका अतिरिक्त भार दुग्ध महासंघ पर पड़ा।



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