प्रवक्ताओं, दैनिक वेतन भोगियों समेत 2.5 हजार सफाई कर्मियों को नहीं मिला मानदेय, अब सीएम से लगाई गुहार
जिले के 40 आईटीआई प्रवक्ताओं के अलावा 422 लघु वेतन कर्मचारियों के अलावा दो हजार अंशकालीन सफाई कर्मियों को लॉकडाउन के दौरान मानदेय नहीं मिल पाया है। प्रवक्ताओं ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है जिसमें कहा है कि पांच महीने से वेतन नहीं मिल पाने से कर्ज लेकर काम चलाना पड़ रहा है। अगस्त में रक्षाबंधन पर्व है तथा उसके पहले वेतन नहीं मिला तो वे यह पर्व भी नहीं मना पाएंगे। अन्य विभागों में भी दैनिक वेतन भोगी, अंशकालीन सफाई कर्मियों को भी वेतन नहीं मिल पा रहा है।
जिले में आईटीआई कांकेर, भानुप्रतापपुर, नरहरपुर, चारामा तथा माकड़ी में संचालित है। इन आईटीआई में लगभग 40 मेहमान प्रवक्ता कार्यरत हैं जो छात्रों को ट्रेड के अनुसार आईटीआई में प्रशिक्षण देते हैं। इनको प्रतिमाह 10 हजार मानदेय मिलता है। इस वर्ष लाकडाऊन लगने के बाद से मार्च माह से वेतन नहीं मिल पा रहा है। परेशान होकर प्रवक्ताओं ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखते कहा है 3 अगस्त के पहले वेतन नहीं मिला तो वे रक्षाबंधन पर्व नहीं मना पाएंगे। महिला प्रवक्ताओं के अनुसार किसी तरह कर्ज लेकर काम चला रहे हैं तथा इतने पैसे भी नहीं हैं कि अपने भाइयों के लिए राखी या मिठाई खरीद सकें।
सफाई कर्मियों को तीन महीने से नहीं मिला मानदेय : स्कूलों में कार्यरत अंशकालीन सफाईकर्मियों को भी मई माह से मानदेय नहीं मिल पाया है। जिले में 2 हजार से ज्यादा अंशकालीन सफाई कर्मी हंै। स्कूल अंशकालीन सफाईकर्मी ब्लाक सचिव मोहित कोशरिया ने कहा तीन माह से मानदेय नहीं मिल पाया है।
मांग को लेकर कलेक्टोरेट आएंगे दैनिक वेतन कर्मी
स्कूलों के हाॅस्टल, आश्रम में काम करने वाले दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को अप्रैल माह से वेतन नहीं मिल पा रहा है। राखी का पर्व निकट होने तथा वेतन नहीं मिलने से दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी काफी परेशान हैं। वेतन की मांग को लेकर दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी जिला मुख्यालय पहुंचकर कलेक्टर व विधायक से शिकायत करने पहुंचने वाले हैं। जिले में 422 दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी कार्यरत हैं।
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