कोरोना के लगातार बढ़ते केस के बीच लोग लापरवाही से बाज नहीं आ रहे हैं। मंगलवार को दंतेवाड़ा परियोजना कार्यालय का जो कर्मचारी पॉजिटिव मिला है, वह सैंपल देने के बाद भी रिपोर्ट आते तक आइसोलेट होने की बजाए मंगलवार को दफ्तर गया था। अब इस मामले के बाद हड़कंप मच गया है। बुधवार को परियोजना कार्यालय बंद कर दिया गया। मंगलवार को कर्मचारी के ऑफिस जाने के मामले में परियोजना अधिकारी के दबाव की बात सामने आई थी। हालांकि खुद मरीज ने इससे इंकार किया है।
स्वास्थ्य विभाग को मिली जानकारी के मुताबिक 25 लोग उसके संपर्क में आए हैं। इनमें 21 वे लोग हैं जो 16 जुलाई की बैठक में साथ थे। हालांकि यह मीटिंग सैंपल कलेक्शन के पहले की है। चूंकि मरीज को पहले से ही लक्षण थे ऐसे में एहतियात बरती जा रही है। परियोजना अधिकारी सहित कार्यालय के सारे कर्मचारियों व उनके परिवार को क्वारेंटाइन कर दिया गया है। सीएमएचओ डॉ. एसपीएस शांडिल्य ने कहा कि दफ्तर के 4 कर्मचारी और बैठक में शामिल हुए 21 लोग इनके संपर्क में आए हैं। इसके अलावा भी अभी जानकारी जुटाई जा रही है। जिला पंचायत सीईओ अश्वनी देवांगन ने कहा कि कर्मचारी पर ऑफिस आने के लिए दबाव जैसी बात सामने नहीं आई है। यदि ऐसा है तो जांच होगी।
मरीज बोले- कामचोर कह रहे इसलिए गया दफ्तर
कोरोना पॉजिटिव आए कर्मचारी ने फोन पर भास्कर को बताया कि हफ्तेभर से सर्दी, खासी थी। 2-3 बार डॉक्टर के पास गया था। मेरी कोरोना जांच नहीं की जा रही थी। मुझे कहा गया कि कोई ट्रेवल हिस्ट्री नहीं है इसलिए जांच नहीं होगी। 18 जुलाई को फिर गया, जांच के लिए इंकार कर दिया गया। मैंने सीडीपीओ मैडम को जानकारी दी। मैडम खुद पहुंचीं व डॉक्टर से मिलकर मेरी जांच करने कहा। इसके बाद ही मेरा सैंपल लिया गया। मैं ऑफिस नहीं जा रहा था। मुझे ऐसा पता चला था कि कामचोर कह रहे हैं। इसलिए मैं मंगलवार को ऑफिस चला गया। किसी ने भी ऑफिस आने दबाव नहीं डाला, अपनी मर्जी से ही गया।
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