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प्रवासियों को 20 दिन रखा क्वारेंटाइन में इसलिए बलौदा ब्लॉक रेड जोन से बाहर

जिले के नौ ब्लाकों में से एक ब्लाक बलौदा जो कोविड 19 कोरोना संक्रमण के प्रभाव से अछूता रहा है। बलौदा ब्लाक को छोड़कर शेष सभी ब्लाक रेड जोन में शामिल हो चुके हैं, पर बलौदा अभी तक आरेंज जोन में है। इसका बड़ा कारण है प्रवासी मजदूरों की शत प्रतिशत मॉनिटरिंग। इस ब्लॉक में वैसे तो साढ़े छह हजार प्रवासियों के लिए जगह बनाई गई थी, पर साढ़े आठ हजार श्रमिक पहुंचे। स्वास्थ्य विभाग के मेनुअल के अनुसार 14 दिनों तक क्वारेंटाइन करना था, पर जांच रिपोर्ट आए बगैर किसी काे नहीं छोड़ा गया। इसलिए साढ़े आठ हजार श्रमिकों को 14 की बजाय 20 दिनों तक क्वारेंटाइन में रखा गया।

यही वजह है कि ब्लॉक सेफ है। इस ब्लॉक में दो कोराेना पॉजिटिव मिले थे। वे दोनों अब स्वस्थ हैं व ब्लॉक में एक भी मजदूर क्वारेंटाइन में नहीं है। यदि कुछ दिन लॉकडाउन हो जाए तो बलौदा ब्लॉक में काेरोना की संभावना ही नहीं रहेगी। 25 मार्च को लॉकडाउन से लेकर श्रमिकों की घर वापसी पर किए क्वारेंटाइन की व्यवस्था तक अधिकारी कर्मी रात दिन मेहनत कर बलौदा ब्लाक में कोरोना का प्रवेश होने नहीं दिया। श्रमिकों की वापसी पर फैलने वाले संक्रमण को लेकर डर था, क्योंकि अधिकांश श्रमिक कोरोना प्रभावित राज्य महाराष्ट्र, गुजरात, मुंबई व दिल्ली से आए थे, इन्हें क्वारेंटाइन करके 14 दिन रखना व क्वारेंटाइन के बाद 14 दिनों तक घरों में क्वारेंटाइन करना चुनौती से कम नहीं थी पर बलौदा ब्लाक जनपद पंचायत के अधिकारी कर्मचारियों ने इसे स्वीकार किया।

जंप के कर्मी दया देवांगन ने बताया कि 6 हजार श्रमिकों को रखने की के लिए ब्लाक में 167 क्वारेंटाइन सेंटर बनाए गए थे, बलौदा ब्लाक के अलावा नवागढ, पामगढ़, मालखरौदा आदि ब्लाकों के श्रमिकों को भी बलौदा में क्वारेंटाइन के लिए भेज दिया गया जिन्हें मिलाकर टारगेट से भी ज्यादा 8 हजार पांच सौबहत्तर श्रमिक बलौदा में क्वारेंटाइन किए गए।

सभी के सहयोग से मिली सफलता अबइसे बरकरार रखने की चुनौती: सीईओ
विभाग के कर्मचारियों, पंचायत सचिवों के अलावा राजस्व विभाग, पुलिस विभाग, स्वास्थ्य विभाग के साथ इससे जुड़े लोगों ने मेहनत की। हमने लक्ष्य तय कर लिया था कि हमें इस पर ध्यान देना है, कि श्रमिकों को परेशानी न हो, सेंटरों का माहौल व वातावरण अच्छा हो, श्रमिकों को भोजन, नाश्ता समय समय पर मिले व प्रसाधन की व्यवस्था अच्छी हो। हमने और हमारी टीम ने रात जागकर श्रमिकों को तत्काल क्वारेंटाइन सेंटरों में भेजा। महत्वपूर्ण बात ये रही कि परीक्षण गया और जिन श्रमिकों के कोरोना टेस्ट कराए गए उनकी रिपोर्ट छोड़ा नहीं गया। कुछ सेंटरों में रिपोर्ट के इंतजार में 14 की जगह 20 दिनों तक श्रमिकों को रखा गया था।नेहा सिंह, सीईओ, बलौदा

टीम वर्क ने कोरोना से जंगमें दिलाई सफलता: बीएमओ
लाकडाउन से लेकर अब तक बिना रूके, बिना थके कोरोना से जंग लड़ने वालो में सबसे आगे रहने वाली टीम स्वास्थ्य विभाग की रही। बीएमओ डॉ. श्रीकेश गुप्ता से लेकर स्वास्थ्य अमला पिछले 4 माह से सेवाएं दिन रात दे रहे हैं। बीएमओ डॉ. श्रीकेश गुप्ता का कहना है कि सभी के सहयोग से ही कार्य किया है। अकेले उनके वश की बात नहीं है। सभी का सहयोग मिला। श्रीकेश गुप्ता, बीएमओ

सख्ती से लॉकडाउन काभी कराया गया पालन
तीसरा व सबसे महत्वपूर्ण विभाग राजस्व व पुलिस विभाग ने कोरोना से जंग में जिम्मेदारी के साथ हिस्सेदारी निभाई है। तहसीलदार अतुल वैष्णव व नायब तहसीलदार किशन मिश्रा ने पुलिस के सहयोग से नगर व तहसील एरिया में ला एंड आर्डर का बखूबी पालन कराया। लॉकडाउन में जरूरत की सामग्री की व्यवस्था कराना हो कि मजदूर परिवार के साथ बाहर के प्रदेशों से आए लोगों के लिये भोजन पानी की व्यवस्था की गई।



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Migrants kept for 20 days in Quarantine hence Baloda block out of Red Zone


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