सोनहत में वैज्ञानिक पद्धति से दो सौ बाड़ी तैयार की जा रही है। किसान की जमीन पर सरकारी प्रोत्साहन से तैयार बाड़ी में हरी सब्जी से जहां एक ओर कुपोषण दूर करने की तैयारी है तो वहीं इससे ग्रामीणों की आय बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। कृषि वैज्ञानिक बाड़ी में कम जमीन पर बेहतर उत्पादन के तरीके बता रहे हैं। कृषि विज्ञान केंद्र सलका के वैज्ञानिक ग्रामीणों को घर के पास बाड़ी बनाकर तरह-तरह की फसलों को उगाने की विधि और कीट प्रबंधन की जानकारी दे रहे हैं।
खासतौर पर इन्हें नई तकनीक की जानकारी दी जा रही है, जिससे वे सब्जी उत्पादन को आजीविका का मुख्य साधन बनाकर कम जमीन पर पोषण वाटिका तैयार कर अच्छी आमदनी कमा सकें। सरकार की महत्वाकांक्षी योजना नरवा, गरूवा, घुरवा, बाड़ी के तहत किसानों को सब्जियों की उच्च गुणवक्ता वाले बीच उपलब्ध कराने के लिए पहल की जा रही है।
कृषि वैज्ञानिक डॉ. केसी राजहंस ने बताया कि बाड़ी में 12 महीने का प्लान तैयार कर सब्जी-भाजी का उत्पादन किया जाएगा। साल भर मौसम वार सब्जी फल के लिए केवीके की ओर से चिन्हित किसानों की बाड़ी के लिए सब्जियों के बीज और फलदार पौधे दिए जाते रहेंगे, ताकि अलग-अलग मौसम के बाड़ी में प्रचुर मात्रा में पोषक सब्जी व फल का उत्पादन हो।
रिसर्च सेंटर वाराणसी से मंगाए बीज
बता दें कि बाड़ी तैयार करने से पहले किसको के माध्यम से बारिश के पहले मिट्टी की जुताई की गई थी। बाड़ी की स्थापना कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों के तकनीकी मार्गदर्शन में किया गया है। खास बात यह है कि बाड़ी के लिए उन्नत बीज इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ वेजिटेबल रिसर्च सेंटर वाराणसी से मंगाए गए हैं कि जो हमारे जिले की मिट्टी के लिए उपयुक्त है।
कम देखरेख और कम लागत में करेंगे उत्पादन
कृषि वैज्ञानिक विजय कुमार ने बताया कि हाईब्रिड किस्मों की अपेक्षा सब्जियों की मुक्त परागित किस्मों में अधिक रोग प्रतिरोधक क्षमता, कम उत्पादन लागत, स्थानीय जलवायु के लिए अनुकूल होने के साथ ही स्थानीय बाजारों में इनकी अधिक मांग भी होती है। इन किस्मों की बीजों के उत्पादन में अधिक तकनीकी ज्ञान की जरूरत नहीं पड़ने के कारण किसान कम देखरेख और कम लागत में सब्जियों का उत्पादन कर सकते हैं।
पोषण बाड़ी दूर करेगी लोगों का कुपोषण
जिला पंचायत सीईओ तूलिका प्रजापति ने बताया कि उन्नत और पौष्टिक साग-सब्जियों के उत्पादन से ग्रामीण क्षेत्र में कुपोषण की दर में भी कमी आएगी। ऐसे में स्थानीय प्रजातियों की पौष्टिकता को ध्यान में रखते हुए बाड़ी तैयार करवाएं जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि बाड़ी में बैगन, भिंडी, टमाटर, फूल गोभी जैसी सब्जियों का उत्पादन सालों भर किया जा सकेगा।
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