जिले के दो सौ स्कूल के एक हजार शिक्षक स्कूल नहीं खुलने से बेरोजगार हो गए हैं। इसमें प्राइवेट समेत सरकारी स्कूल में पढ़ाने वाले अतिथि शिक्षकों को महामारी के दौर में 4 महीने से वेतन नहीं मिला है। कोरोना की वजह से उपजी आर्थिक तंगी से कहीं कोई शिक्षक सड़क किनारे सब्जी बेच रहा है तो कोई मजदूर और कारपेंटर का काम कर अपनी रोजी-रोटी कमा रहा है।
दरअसल यह हालात इसलिए बन गए है क्योंकि शिक्षकों को 30 अप्रैल के बाद स्कूलों से हटा दिया गया है। बेरोजगार हो चुके शिक्षकों ने कहीं परिवार का पेट पालने के लिए या तो राशन दुकान खोल ली है या वे सब्जी विक्रेता बन गए हैं। कोरोना संक्रमण और लॉकडाउन के बाद बनी परिस्थितियों के चलते जहां जीवन थम सा गया है। वहीं कई लोगों के जीवन पर इसका विपरीत प्रभाव पड़ा है। सरकारी स्कूल के अतिथि शिक्षक भी इस परेशानी से गुजर रहे हैं। अप्रैल के बाद सभी स्कूल बंद हैं, इन शिक्षकों को 4 महीने का वेतन नहीं मिला है। जिले के 250 अतिथि शिक्षक अपनी नियमितीकरण और परेशानियों को लेकर कलेक्टर, मंत्री, विधायक से मिलकर अपनी समस्याएं बता रहे हैं। इनके सामने समस्या तो हर साल बनती है, लेकिन कोरोना की वजह से चिंता सताती है कि आगे भविष्य क्या होगा?
200 रुपए रोजी पर अतिथि शिक्षक बन गए कारपेंटर
अतिथि शिक्षक जश्वीर सिंह खड़गवां के स्कूल में अतिथि शिक्षक के पद पर थे। उन्होंने बीए और बीएड किया है। इनका सपना था कि वह अच्छे शिक्षक बनें, कुछ हद तक तो सपना पूरा भी हुआ और अतिथि शिक्षक की नौकरी मिल गई। प्रशासन ने 30 अप्रैल को सभी अतिथि शिक्षकों को कार्यमुक्त कर दिया। इससे नौकरी चली गई। कोरोना की वजह से स्कूल बंद होने से वे बेरोजगार हो गए। जश्वीर 25 सौ रुपए महीने पर दूसरे का ट्रैक्टर चला रहे हैं। हायर सेकंडरी स्कूल कोटाडोल भरतपुर के अतिथि शिक्षक मनोज साहू कारपेंटर का काम कर रहे हैं। बेरोजगारी में घर बैठे इससे दिन में 200 रुपए रोजी मिलती है।
कहीं भी नहीं मिल रही नौकरी तो जो काम मिल रहा, कर रहे
बंजारीडांड में सियाराम गुप्ता मकान निर्माण में मजदूरी कर परिवार पाल रहे हैं। अतिथि शिक्षक से हटाए जाने के बाद ग्रामीण क्षेत्र और कोरोना संक्रमण का दौर होने की वजह से उन्हें कहीं भी नौकरी नहीं मिल रही। इससे आसपास के गांव में चल रहे मजदूरी के काम को उन्होंने अपना लिया। मनेंद्रगढ़ के घुटरा में शिक्षक अखिलेश राय खेती बाड़ी से जुड़ गए हैं। इनका यही कहना है कि अतिथि शिक्षकों के बहुत बुरे हाल हैं, सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि स्कूल बंद रहने तक यह लोग बेरोजगार रहेंगे। इस दौरान परिवार का भरण-पोषण करने के लिए जो भी काम मिल रहा है, वह करके रोजी कमा रहे हैं।
स्कूल हुए बंद, कर्जदारों से तंग आकर खोल ली सब्जी दुकान
पटना | कोरोना संक्रमण खतरे के बीच स्कूलों के नहीं खुलने से आर्थिक संकट से जूझ रहे कुछ शिक्षक सब्जी बेच रहे हैं, तो कुछ दूसरे धंधे में लग गए हैं। पाण्डवपारा में एक स्कूल संचालक की मजबूरी यह बन गई है कि वह गांव में किराने की दुकान चलाकर अपनी रोजी-रोटी कमा रहे हैं। शिशु विकास शिक्षा निकेतन के संचालक रंजीत मंडल ने बताया कि वह 16 स्टाफ के साथ स्कूल का संचालन कर रहा था, लॉकडाउन के बाद बिगड़ती परिस्थितियों से स्कूल बंद हो गए, जिस कारण कर्जदारों के दबाव से परेशान होकर उधार के सामान लेकर पाण्डवपारा रामनाथ चौक में किराने की दुकान संचालित कर रहे हैं। खोड़ के रहने वाले शिक्षक सुदामा ठाकुर ने बताया कि परिवार की जिम्मेदारी की वजह से छोटे भाई और माता-पिता के भरण-पोषण की चिंता है, कोई काम नहीं मिला, 4 महीने से परेशान होकर सब्जी बेचने का व्यवसाय शुरू किया है।
शिक्षकों ने कॉल कर बताई परेशानी
स्कूल संचालक व शिक्षकों ने दैनिक भास्कर को कॉल कर अपनी परेशानी बताई। इसमें सरदार बल्लभ भाई पटेल हाई स्कूल के संचालक चंद्रशेखर अवस्थी, सुखदेव सिंह, हायर सेकंडरी स्कूल संचालक प्रेम सागर सिंह, आदर्श शिशु विद्यालय के रामकिंकर पाण्डेय, विजय कुशवाहा, सुरेश साहू, प्रदीप साहू ने बताया कि अब कर्ज लेकर जैसे-तैसे गुजारा हो रहा है।
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