राज्य सरकार ने मवेशियों की सुरक्षा और महिलाओं को सशक्त व आत्मनिर्भर बनाने के लिए कुछ दिनों पहले गोधन न्याय योजना शुरू की। इस याेजना के तहत किसानों से 2 रुपए प्रति किलो की दर से गोबर खरीदकर उससे खाद व अन्य सामान बनाने की बात कही गई है, लेकिन कोंडागांव जिले में महिलाएं पिछले दो साल से गोबर से खाद, दीये, सजावट के सामान, की-रिंग समेत अन्य सामान बना बेच रहीं। इस कार्य से बड़ेकनेरा में महिला समूह को दो साल में 12 लाख की आमदनी हुई है। समूह की महिलाएं इस काम को और आगे ले जाने के लिए कई महिलाओं को प्रशिक्षण दे रहीं, जिसका फायदा इन महिलाओं को आने वाले दिनों में मिलेगा।
जिले के बड़ेकनेरा में कामधेनु गौशाला का संचालन कर रही महिलाएं पिछले दो वर्षों से गोबर से विभिन्न सामान तैयार कर रही हैं। गौशाला की अध्यक्ष वेदेश्वरी ने बताया कि इस गौशाला में 250 से अधिक पशुओं की देखरेख कर रही दर्जनभर महिलाएं यहां गोबर वर्मी कम्पोस्ट बना रही। इसके अलावा गोबर से दीये, सजावट के सामान, मूर्तियां, की-रिंग, शोपीस, गमला, जीवामृत, कीट नियंत्रक, राखी तैयार कर रही हैं। गांव की महिलाओं को भी प्रशिक्षित कर रही हैं।
नागपुर के प्रशिक्षकों ने एक माह तक दिया था प्रशिक्षण: निशक्त पशुओं के लिए ये महिलाएं हाईटेक तकनीक से ग्रीन ग्रास भी तैयार कर रही हैं, जो पखवाड़ेभर में तैयार हो जाता है। यही चारा इन पशुओं को दिया जाता है। महिलाओं को प्रशिक्षित करने आए नागपुर महाराष्ट्र के देवलापाल गौ अनुसंधान केंद्र के प्रशिक्षकों ने बड़ेकनेरा की कामधेनु गौशाला देख उससे प्रभावित होकर उन्हें एक माह तक गोबर से विभिन्न उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण दिया था।
महिला समूह का कार्य सराहनीय: कलेक्टर
गौशाला की अध्यक्ष वेदेश्वरी ने बताया कि अब तक इस गौशाला से 25 से अधिक महिलाएं जुड़ चुकी हैं। समूह के माध्यम से महिलाएं पिछले दो साल में गोबर से बनाए गए 10 हजार दीये 6 रुपए प्रति नग के हिसाब से बेच चुकी हैं। इससे 25 हजार रुपए का फायदा हुआ है। इसके अलावा अन्य सामानों की बिक्री हो चुकी है। कलेक्टर पुष्पेंद्र मीणा ने कहा कि महिला समूहों के कार्य काफी सराहनीय है। इस काम में गांव की अन्य महिलाओं को जोड़ने के लिए कहा गया है। गांव की महिलाएं प्रशिक्षित होकर आत्मनिर्भर बनेंगी।
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