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जुलाई में कम बारिश होने से बांधों में 12 फीसदी तक ही जलस्तर बढ़ा, प्रदेश में बारिश का कोई सिस्टम अभी सक्रिय नहीं

राज्यभर में जून की भारी बारिश में ज्यादातर बांध 50 से 85 फीसदी से तक भर गए। कोरबा के मिनीमाता बांगो में तो पानी का लेवल 86.32 प्रतिशत तक भर गया। जुलाई में स्थिति बदल गई। पूरे महीने इतनी कम बारिश हुई कि 30 दिनों में इन बांधों में पानी का स्तर पांच से 12 फीसदी तक ही बढ़ पाया। दिलचस्प बात है कि हर साल सबसे ज्यादा बारिश वाले बस्तर संभाग में भी इस साल जुलाई में कम वर्षा हुई है। मौसम विज्ञानियों का कहना है कि फिलहाल बंगाल की खाड़ी में कोई बड़ा सिस्टम नहीं बना है, जिसकी वजह से राज्यव्यापी भारी बारिश का पूर्वानुमान नहीं किया जा सकता। जून में 30 तारीख तक राज्य में 278 मिमी बारिश हुई। यह औसत से 44 फीसदी अधिक थी।

इस वजह से राज्य के सभी प्रमुख बांध, नदी, तालाबों का जलस्तर काफी बढ़ गया था। आशंका जताई जा रही थी कि जुलाई में ज्यादा बारिश होने की स्थिति में राज्य में अतिवृष्टि की स्थिति निर्मित न हो जाए, लेकिन जून की भारी बारिश को जुलाई के शार्ट रैन ने पूरा कर दिया। हालात यह है कि बांधों में भी जलस्तर में एक-दो फीसदी या 10 से 12 फीसदी की ही वृद्धि हो पाई। कुछ जिले जहां अच्छी बारिश हुई वहां भी बांधों में अधिकतम 30 प्रतिशत तक ही वाटर लेवल बढ़ा है। झुमका, मनियारी और खारंग में ही अभी 100 फीसदी पानी भरा है। दो बांध में 90 से 100 फीसदी के बीच पानी है और छह में वाटर लेवल 80 से 90 प्रतिशत है।
हल्की से मध्यम बारिश की संभावना
मौसम विज्ञानियों के अनुसार एक मानसून द्रोणिका फिरोजपुर, हिसार, गुरुग्राम, ग्वालियर, बांदा, रीवा, डाल्टनगंज, दुमका और उसके बाद पूर्व की ओर होते हुए असम नागालैंड तक है। पश्चिम विदर्भ से दक्षिण तटीय आंध्रप्रदेश तक तेलंगाना होते हुए 1.5 किलोमीटर ऊंचाई तक एक अन्य द्रोणिका है। एक चक्रवाती घेरा उत्तर-पूर्व मध्यप्रदेश और उसके आसपास 1.5 किलोमीटर ऊंचाई पर है। इस वजह से प्रदेश में अनेक जगह पर हल्की से मध्यम वर्षा होने या गरज-चमक के साथ छींटे पड़ने की संभावना है।

जुलाई में 25 फीसदी कम पानी
जुलाई में इस साल 264.5 मिमी पानी बरसा है। यह औसत से 25 फीसदी कम है। 1 जून से देखा जाए तो राज्य में अब तक 544.7 मिमी पानी बरस चुका है। यह औसत यानी 558.0 मिमी के आसपास है। इस तरह जुलाई में हुई कम बारिश को जून की एक्सेस पानी ने पूरा कर दिया। लालपुर मौसम केंद्र के मौसम विज्ञानी एचपी चंद्रा के अनुसार इस साल जुलाई में तीन से चार बार मानसून ब्रेक के हालात बने। मानसून ब्रेक याने मानसून द्रोणिका का भारत के मध्य हिस्से से उत्तरी हिस्से की ओर शिफ्ट हो जाना है। यह स्थिति में बारिश कमजोर हो जाती है। यही वजह है कि इस साल पूरे बस्तर संभाग में कम बारिश हुई है।



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फाइल फोटो।


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