राजेश सिंह/वासुदेव करण,झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले केे बहरागोड़ा प्रखंड अंतर्गत चिंगड़ा पंचायत कोसाफालिया (बांसदा) का सिपाही 21 वर्षीय गणेश हांसदा (बैच नंबर-167) सितंबर-2018 में बिहार रेजिमेंट की ए-कंपनी में भर्ती हुआ था। गणेश की शहादत की सूचना उसके बड़े भाई दिनेश हांसदा को मंगलवार रात करीब 10.30 बजे लेह के सेना मुख्यालय से फोन पर दी गई। उसके बाद वह रातभर सो नहीं सका। बुधवार तड़के तीन बजे उसने माता-पिता को छोटे भाई के शहीद होने की सूचना दी। इसके बाद यह खबर जंगल की आग की तरह गांव में फैल गई। बुधवार सुबह डीसी रविशंकर शुक्ला, एसएसपी डॉ एम. तमिल वाणन, घाटशिला एसडीओअमर कुमार, एसडीपीओराजकुमार मेहता, बीडीओराजेश साहू, सीओहीरा कुमार आदि शोकाकुल परिवार सेे मिले।
डीसी रविशंकर शुक्ला ने गणेश के बड़े भाई से पूरी घटना की जानकारी ली। फिर कहा- गुरुवार शाम गणेश हांसदा का पार्थिव शरीर गांव पहुंचेगा। उसके अंतिम दर्शन के लिए सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा ख्याल रखा जाएगा। एक बार में एक साथ पांच लोग ही पार्थिव शरीर को श्रद्धांजलि देंगे। भीड़ को रोकने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किए जाएंगे। डीसी ने उक्त स्थल का भी निरीक्षण किया, जहां उसका अंतिम संस्कार किया जाएगा। जिस स्थान पर अंतिम संस्कार होगा, वहां भीड़ होने नहीं दी जाएगी। दूर से ही लोग सोशल डिस्टेंस का पालन करते हुए अंतिम संस्कार देंखेगे।
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पिता... बेटे ने गांव का नाम रोशन किया
पिता सुबदा हांसदा ने कहा- गणेश 5 दिसंबर को घर आया था। 27 जनवरी को बेटे को विदा किया था। क्या पता था बेटे की अंतिम विदाई होगी। 3 फरवरी तो लेह पहुंचने के बाद गणेश ने फोन पर जानकारी दी थी कि वह सही सलामत डयूटी ज्वाइन कर लिया है। गणेश में सेना में भर्ती होने का जुनून सवार था। बेटा शहीद हो गया, पर घर-परिवार व गांव का नाम रोशन कर गया।
भाई.. भाई की शहादत पर रातभर बेचैन रहा
गणेश के बड़े भाई दिनेश हांसदा ने बताया- 16 जून की रात 10.30 बजे फोन पर गणेश के किसी सीनियर ने बताया- चीनी सैनिक के साथ झड़प में उनका भाई भी शहीद हो गया है। इसके बाद वह रातभर सो नहीं सका। बुधवार तड़के करीब 3 बजे उसने पिता को उठाकर घटना की जानकारी दी। मेरा भाई वीर था। अगर चांस मिला तो मैं भी शहीद होने के लिए तैयार रहूंगा।
भाभी...गणेश ने तनाव की दी थी सूचना
गणेश की भाभी सोनाली हांसदा ने बताया- उनकी शादी एक माह पूर्व ही हुई है। गर्व है कि एक ऐसेे परिवार से जुड़ी जिसके सदस्य देश की रक्षा के लिए शहीद हो गए। दो सप्ताह पूर्व गणेश से फोन पर बात हुई थी। कहा था- सीमा पर बहुत झमेला चल रहा है। लेकिन टेंशन लेने की जरूरत नहीं है। शादी के बारे में पूछने पर कहा था- अभी देश की सेवा करनी है।
बचपन से मेधावी था गणेश...माता-पिता और भाई ने मजदूरी कर गणेश को पढ़ाया था, प्रथम श्रेणी से पास की थी मैट्रिक
गणेश के घर में चार सदस्य हैं। पिता सुबदा हांसदा (62), मां कापरा हांसदा (55), बड़े भाई दिनेश हांसदा (25) और भाभी सोनाली हांसदा हैं। माता-पिता और भाई ने मजदूरी करके गणेश को पढ़ाया-लिखाया। गणेश की आठवीं तक शिक्षा कोसाफालिया उत्क्रमित मवि में हुई थी। इसके बाद केरूकोचा हाईस्कूल से मैट्रिक की परीक्षा प्रथम श्रेणी से पास की। फिर एलबीएसएम कालेज में इंटर साइंस में दाखिला लिया। यहां एनसीसी में तीन साल कोर्स करने के बाद सेना में बहाली के लिए प्रयास किया। दूसरे प्रयास में बिहार रेजिमेंट में जीडी (जेनरल डयूटी) के लिए चयन हुआ।
बेटे ने मेरे दूध की लाज रख ली। गणेश बचपन से कहता था कि मां ऐसा कुछ करूंगा कि गांव ही नहीं, राज्यभर में लोग मुझे याद करेंगे। उसने वाकई ऐसा कर दिखाया कि पूरा देश उसे सलाम कर रहा है। - कापरा हांसदा, शहीद गणेश हांसदा की मां
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