जिले की गर्भवती और धात्री महिलाओं को आंगनबाड़ी केंद्र से मिलने वाला पोषण युक्त आहार बंद है। महिलाओं को यह आहार कोरोना संक्रमण को लेकर देश में लागू लोक डाउन से पहले से ही नहीं मिल रहा है। जनवरी माह में आहार बंटा भी गया तो महिलाओं को मीनू के अनुसार नहीं मिला। सिर्फ चावल और दाल ही बांटा गया।जबकि इसमें बादाम,गुड़ और आलू नदारद था।यह पोषाहार मार्च माह से पूरी तरह बंद हो गया। इससे जिले की गर्भवती और धात्री महिलाओं के सामने विकट स्थिति उत्पन्न हो गई है। लाक डाउन के कारण गरीब तो गरीब मध्यम वर्ग के परिवारों के बीच भी समस्या उत्पन्न हो गई है। इसका असर सीधे जिले के करीब 28 हजार गर्भवती और धात्री महिलाओं पर पड़ रहा है। उल्लेखनीय है कि छह माह से लेकर छह वर्ष के बच्चे, गर्भवती और धात्री महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और बच्चों को स्कूली शिक्षा से पूर्व की शिक्षा देने के लिए जिले में 1124 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं।ये सभी केंद्र जिले के छह बाल विकास परियोजना के तहत संचालित है।इनमें हंटरगंज ,परतापुर, चतरा, सिमरिया, टंडवा व इटखोरी शामिल है।
इन सभी परियोजना के तहत संचालित आंगनबाड़ी केंद्र में उसके पोषण क्षेत्र से लगभग 28 हजार गर्भवती और धात्री महिलाएं निबंधित हैं। इनमें गर्भवती महिलाओं की संख्या करीब 13 हजार 500 एवं धात्री महिलाओं की संख्या करीब 14 हजार 500 है। सबसे अधिक गर्भवती और धात्री महिलाओं की संख्या बाल विकास परियोजना चतरा और सबसे कम टंडवा परियोजना में हैं। आंगनबाड़ी केंद्र देवरिया की सेविका रीता देवी ने बताया कि गर्भवती और धात्री महिलाओं का पोषाहार मार्च माह से बंद है।महिलाएं हर दिन पोषाहार की मांग करते हैं। इससे परेशानी बढ़ गई है।
जिला समाज कल्याण पदाधिकारी सलाम जफर खिजरी ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्र में पोषाहार उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी जेएसएलपीएस को दिया गया है।केंद्रों पर जल्द से जल्द पोषाहार उपलब्ध कराने के लिए पत्र लिखा गया है।
राशि नहीं, पोषाहार उपलब्धता हो रही है परेशानी :डीपीएम
जेएसएलपीएस के डीपीएम निशांत एक्का ने बताया कि राशि के अभाव में केंद्रों पर पोषाहार उपलब्ध कराने में परेशानी हो रही है। राशि के लिए विभाग को लिखा गया है। राशि मिलते ही केंद्रों पर पोषाहार उपलब्ध कराने का कार्य शुरु कर दिया जाएगा।
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