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Jharkhand daily news

रवि मिश्रा,इंटीग्रेटेड स्टील प्लांटाें में वर्ष 2019-20 में करीब 58 मिलियन टन काेकिंग काेल की खपत हुई थी। इसमें देश काे लगभग 51 मिलियन टन काेकिंग काेल विदेशाें से आयात करना पड़ा था। लेकिन अब ऐसा नहीं हाेगा। सिंफर ने एक ऐसी तकनीक ईजाद की है, जिससे काेकिंग काेल का आयात करीब 40-50 प्रतिशत तक कम हाे जाएगा। आत्म निर्भर भारत के उद्देश्य से सिंफर ने स्टेम चार्जिंग की तकनीक विकसित की है, जाे देश के स्टील प्लांटाें काे आत्मनिर्भर बना देगी।

निदेशक डाॅ प्रदीप कुमार सिंह के मार्गदर्शन में संस्थान की टीम ने देसी काेयले काे ही स्टील प्लांट के उपयाेग लायक बनाने का तरीका खाेज लिया है। टीम का नेतृत्व कर रहे सिंफर डिगवाडीह के डाॅ मनीष कुमार ने बताया कि इस तकनीक से देश के अपने काेयले काे ही कंप्रेस कर केक बना सकते हैं, जिसके बाद वह प्लांट में उपयाेग लायक हाे जाता है।

तकनीक से 35% तक बढ़ जाती है काेयले की उत्पादकता

स्टेम चार्जिंग टेक्नाेलाॅजी से काेक प्लांट की उत्पादकता 30-35 प्रतिशत तक बढ़ जाती है। मसलन किसी काेक प्लांट में प्रतिदिन 100 टन काेक बनते हैं ताे वह स्टेम चार्जिंग का उपयाेग कर 130 टन तक काेक बना पाएंगे। स्टील प्लांट में काेक मेकिंग के लिए काेकिंग काेल का उपयाेग हाेता है। भारत में बेहतर ग्रेड के काेयला का बड़ा भंडार नहीं हाेने के कारण अच्छे ग्रेड के काेयले का विदेशाें से ही अायात करना पड़ता है।

बड़े स्टील प्लांटों में विदेशी है कोक मेकिंग टेक्नोलॉजी : सेल, टाटा स्टील, जिंदल स्टील, वेदांता जैसे यहां जाे इंटीग्रेटेड स्टील प्लांट हैं, वहां उपयाेग में लाई जा रही काेक मेकिंग टेक्नाेलाॅजी विदेशी है। इन प्लांटाें के अपने ब्लास्ट फर्निश व काेक ओवन हाेते हैं। इससे जाे काेक निकलता है, उसका अपने प्लांट में उपयाेग करते हैं। पहले भट्ठे के ऊपर से काेक चार्जिंग हाेती थी। इससे काेयला कंप्रेस नहीं हाे पाता था, लेकिन स्टेम चार्जिंग में पहले ही काेयले काे बाहर में ही कंप्रेस कर केक बनाकर काेक अ‌वन में चार्ज किया जाता है।

विदेशी तकनीक से कम खर्च में बन जाएगा काेक प्लांट

विदेशी टेक्नाेलाॅजी की तुलना में स्टेम चार्जिंग टेक्नाेलाॅजी का उपयाेग कर काेई काेक प्लांट लगाना चाहता है ताे कम खर्च में बन जाएगा। ऐसे में संस्थान पूरी टेक्नाेलाॅजी उपलब्ध कराएगा। मशीन या काेक ओवन का डिजाइन करने के साथ सभी जानकारी व इंजीनियरिंग संस्थान दे सकता है। इस टेक्नाेलाॅजी पर काम करने वाली टीम में डाॅ मनीष कुमार के अलावा डाॅ आशीष मुखर्जी, जीके बायन और डाॅ माेनालिसा भी शामिल हैं।



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स्टेम चार्जिंग टेक्नाेलाॅजी पर काम करने वाली सिंफर की टीम।


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