(विनय चतुर्वेदी) रास चुनाव में भाजपा की स्ट्रेटजी सफल रही। पार्टी प्रत्याशी को जीत मिली और सत्ताधारी दल झामुमो पर एक वोट की मनोवैज्ञानिक बढ़त भी। भाजपा चाह रही थी कि झामुमो का वोट कांग्रेस को न मिले। झामुमो के सभी विधायक शिबू सोरेन को ही वोट करें और हुआ भी वही। पार्टी ने झामुमो पर बढ़त के लिहाज से 31 का आंकड़ा तय किया और विधायक कमलेश सिंह को साथ जोड़कर इसे पूरा भी किया।
पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ओम माथुर, राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह व प्रदेश संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह ने जीत की यह पटकथा लिखी। ओम माथुर आजसू के साथ समन्वय व कमलेश सिंह को साथ लाने में लगे। अरुण सिंह ने सरयू राय के गिले-शिकवे दूर करने का काम लिया तो प्रदेश संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह ने निर्दलीय विधायक अमित यादव को अपने साथ रखा।
स्पीकर और झामुमो के साथ खेला माइंड गेम
भाजपा ने स्पीकर रवींद्र नाथ महतो व झामुमो के साथ माइंड गेम खेला। पहले मतदाता सूची में बाबूलाल मरांडी का नाम भाजपा विधायक खेमे में शामिल करवा लिया। फिर झामुमो खेमे में प्रचारित करवा दिया कि सबसे अधिक वोट भाजपा को आएगा। इसके बाद झामुमो खुद अधिक वोट लाने के चक्कर में पड़ गया।
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