शादी, दशगात्र सहित अन्य सामाजिक कार्यक्रमों के लिए अब अनुमति लेने एसडीएम व तहसील कार्यालयों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं है। सरकार ने ऑनलाइन आवेदन करने की सुविधा दी है। अब लोगों को अनुमति लेने के लिए लोकसेवा एवं च्वाइस सेंटरों में जाना होगा। वहां आवेदन करने के बाद अनुमति ऑनलाइन मिलेगी। इसे प्रिंट निकाल सकते हैं। इसके लिए निर्धारित फीस अदा करनी पड़ेगी। इस सुविधा से लोगों को काफी राहत मिलेगी।
सरकार ने शादी की अनुमति के लिए तहसील दफ्तरों में रोज सैकड़ों लोग आवेदन लेकर कतार में खड़े रहते थे, इससे परिसर में भीड़ होने से सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं हो पा रहा था और इससे लोगों को परेशानी होती थी।
इसे देखते हुए सरकार ने यह फैसला लिया है। चिप्स प्रभारी भूपेन्द्र अंबिलकर ने बताया कि गुरुवार से शादी ब्याह व दशगात्र की अनुमति के लिए सरकार ने ऑनलाइन सुविधा की शुरुआत की है। लोकसेवा व च्वाइस सेंटरों को इसकी जिम्मेदारी दी है। वहां से अब ऑनलाइन आवेदन भरा जाएगा, जिसके बाद ऑनलाइन अनुमति मिलेगी।
वाट्सएप नंबर पर अनुमति ऑनलाइन भेजी जाएगी
चिप्स प्रभारी ने बताया कि लोगों को अनुमति लेने में काफी परेशानी होती थी, जिसे देखते हुए सरकार ने समस्या का हल कर चिप्स को इसकी जिम्मेदारी दी है। चिप्स ने सभी लोक सेवा व च्वाइस सेंटरों को जिम्मेदारी दी है।यह अनुमति तीन दिवस के भीतर मिल जाएगी। आवेदन करने के बाद तीन दिन के अंदर सीधे आवेदक के वाट्सअप नंबर पर अनुमति ऑनलाइन भेजी जाएगी। आवेदक इसे प्रिंट भी कर सकता है।
जानिए... जिले में कितने लोकसेवा व च्वाइस सेंटर
आय, जाति एवं अन्य कागजात बनाने के लिए लाेगों को दिक्कत न हो, इसके लिए सरकार ने सारे आवेदनों का जल्द निराकरण लोकसेवा एवं च्वाइस सेंटरों की सुविधा दी है। यहां सभी प्रकार के दस्तावेज बनाए जा रहे हैं। इसमें अधिकारियों के डिजिटल हस्ताक्षर की सुविधा दी गई है। चिप्स प्रभारी ने बताया कि जिले में 10 लोकसेवा एवं 200 च्वाइस सेंटर हैं। यहां लोगों को सारी सुविधाएं दी जा रही है।
एसडीएम कार्यालयमें ऑफलाइन बंद
शुक्रवार से एसडीएम कार्यालय से शादी ब्याह की अनुमति ऑफलाइन बनना बंद हो गया है। अब च्वाइस सेंटरों से सीधे ऑनलाइन अनुमति जारी किए जाएंगे। नई सुविधा मिलते ही लोग च्वाइस सेंटरों की ओर चले गए, जिससे एसडीएम कार्यालय में भीड़ लगनी कम हो गई। अब अनुमित के लिए लोग शहर आने के बजाए अपने क्षेत्र के च्वाइस सेंटरों में जा रहे हैं। शहर आने की भी जरूरत नहीं पड़ रही है।
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